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उद्धव ठाकरे को लग सकता है बड़ा झटका, विधायकों की शिंदे खेमे से बढ़ी नजदीकियां

मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। खबरों के मुताबिक, न सिर्फ छह लोकसभा सांसद बल्कि उनकी पार्टी के कई विधायक भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। इससे आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना यूबीटी के कुल 20 विधायक हैं, जिनमें से कई विधायक अलग गुट बनाने या सीधे शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह घटनाक्रम महज अटकलें नहीं, बल्कि तेजी से आकार ले रही रणनीति का हिस्सा है।

उद्धव का साथ छोड़ सकते हैं कई विधायक

एक विश्वसनीय सूत्र का दावा है कि अगर शिंदे शिवसेना के यूबीटी सांसदों को अपने पक्ष में लाने में सफल हो जाते हैं, तो अगले दो महीनों में बड़ी संख्या में विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। इससे उद्धव ठाकरे की पार्टी को आने वाले दिनों में बड़ा झटका लग सकता है। उद्धव ठाकरे खेमा भी इन संभावित घटनाक्रमों से अवगत है। यही कारण है कि उन्होंने हाल ही में मातोश्री स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों की आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इसके अलावा, विधायकों और एमएलसी की एक महत्वपूर्ण बैठक 22 जून को निर्धारित की गई है।

उद्धव खेमे को सता रहा डर

उद्धव खेमे में अचानक बढ़ी हलचल से संकेत मिलता है कि शिंदे गुट किसी बड़े राजनीतिक अभियान की तैयारी कर रहा है। अगर यह फूट पड़ती है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।वहीं इस बीच शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निर्देश पर लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र के जरिए पार्टी के कुछ सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने अथवा किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय की संभावनाओं पर गंभीर आपत्ति जताई गई है।

पत्र में क्या लिखा

पत्र में लिखा है कि वास्तविक शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने का हमारा दावासुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और यह पत्र उस दावे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लिखा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के चुनाव चिन्ह पर निर्वाचित कुछ सांसद लोकसभा में एक अलग समूह के रूप में मान्यता प्राप्त करने या किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय करने के लिए आपके कार्यालय से संपर्क कर रहे हैं या संपर्क करने पर विचार कर रहे हैं।

चूंकि ऐसी रिपोर्टें राजनीतिक दलों और विधायी निकायों को संचालित करने वाली संवैधानिक प्रणाली से सीधे संबंधित मुद्दे उठाती हैं, इसलिए मैं पार्टी का पक्ष प्रस्तुत करना चाहूंगा। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) एक ही राजनीतिक दल है और कानून की नजर में भी यही स्थिति है। संसदीय दल का अस्तित्व पूरी तरह से राजनीतिक दल पर निर्भर है और यह उसी के एक अंग के रूप में काम करता है। संवैधानिक ढांचा सदन के भीतर एक ही राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई प्रतिस्पर्धी समूहों के अस्तित्व की परिकल्पना नहीं करता है।

परिणामस्वरूप, संसद में केवल एक ही अधिकृत पार्टी नेतृत्व, एक ही मान्यता प्राप्त पार्टी व्हिप और एक ही मान्यता प्राप्त पार्टी संरचना हो सकती है, जो राजनीतिक पार्टी और उसके सक्षम निकायों के अधिकार के तहत कार्य करती है।”(एजेंसी)

 

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