सड़क हादसे में मृतक के परिजनों को अब मिलेगा 24.39 लाख रुपये मुआवजा, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
Road Accident Compensation: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को राहत प्रदान करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ा दी है। बिलासपुर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की एकल पीठ ने मुआवजे की राशि 17.40 लाख रुपये से बढ़ाकर 24.39 लाख रुपये कर दी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि निर्णय की सूचना आश्रितों को हिंदी या छत्तीसगढ़ी भाषा में देवनागरी लिपि में दी जाए, ताकि वे आदेश और मुआवजे की राशि को आसानी से समझ सकें। यह मामला सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले रूप सिंह के परिवार से जुड़ा है। मृतक के आश्रितों ने पहले निर्धारित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने मृतक की आय का दोबारा आकलन किया और मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी का आदेश दिया।
17.40 लाख रुपए से बढ़ाकर 24.39 लाख रुपए किया मुआवजा
मोटर दुर्घटना के एक मामले में, गरियाबंद स्थित अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 11 फरवरी, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए मृतक के परिवार को ₹17,40,760 का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस राशि को अपर्याप्त मानते हुए, भारती ध्रुव और अन्य ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। अपील में मुख्य रूप से मृतक की आय के कम आकलन का मुद्दा उठाया गया था। सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना के आधार पर मुआवजे की पुनर्गणना की। अदालत ने सभी निर्धारित मदों में गणना के बाद कुल मुआवजा 24,39,420 रुपए तय किया। पहले से निर्धारित राशि घटाने पर आश्रितों को 6,98,660 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे।
न्यूनतम मजदूरी के आधार पर दोबारा तय की आय
सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने मृतक की मासिक आय के निर्धारण पर भी विचार किया। न्यायाधिकरण ने मृतक की मासिक आय ₹7,800 अनुमानित की थी। हालांकि, छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना के आधार पर, उच्च न्यायालय ने मासिक आय ₹10,100 निर्धारित की। परिणामस्वरूप, मृतक की वार्षिक आय ₹121,200 थी। आय के पुनर्निर्धारण के बाद, न्यायालय ने मुआवजे की गणना में आवश्यक संशोधन किए, जिससे मृतक के आश्रितों को देय कुल राशि में वृद्धि हुई।
भविष्य की आय वृद्धि और अन्य मदों पर भी विचार
मुआवज़े की गणना करते समय, हाईकोर्ट ने प्रणय सेठी, सरला वर्मा और मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों पर विचार किया। कोर्ट ने भविष्य में आय वृद्धि के लिए 40 प्रतिशत भत्ता जोड़ने सहित अन्य निर्धारित मुआवज़ा मदों में भी संशोधन किया। इन सभी कारकों पर विचार करने के बाद, कुल मुआवज़ा राशि ₹2,439,420 निर्धारित की गई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि पर दावा आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। अधिकरण के मूल अवार्ड की अन्य शर्तें यथावत रहेंगी।
आश्रितों को हिंदी या छत्तीसगढ़ी में मिलेगी जानकारी
इस मामले में हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्देश आश्रितों को उनकी समझ में आने वाली भाषा में निर्णय की जानकारी उपलब्ध कराने से संबंधित है। न्यायालय ने रजिस्ट्री को संबंधित क्षेत्र के कानूनी सेवा प्राधिकरण के समन्वय से और सहायक स्वयंसेवी संस्थाओं की सहायता से आश्रितों को निर्णय की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह जानकारी हिंदी या छत्तीसगढ़ी में देवनागरी लिपि में भेजी जाएगी, ताकि आश्रित बढ़ी हुई मुआवज़े की राशि और न्यायालय के आदेश को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायालय के फैसले की जानकारी संबंधित पक्षों तक ऐसी भाषा में पहुंचे, जिसे वे आसानी से पढ़ और समझ सकें।
आश्रितों की अपील पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
अधिवक्ता सी.आर. साहू ने अपीलकर्ताओं की ओर से पैरवी की। आश्रितों की अपील पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ा दी और निर्देश दिया कि निर्णय स्थानीय भाषा में लिखित रूप में सूचित किया जाए। न्यायालय के आदेश के अनुसार, मृतक के परिवार को पहले से निर्धारित मुआवजे के अतिरिक्त ₹698,660 मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, इस अतिरिक्त राशि पर निर्धारित ब्याज भी लगेगा। (एजेंसी)

