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UPI चार्ज पर विपक्ष के आरोपों को केंद्र ने किया खारिज, कहा -कोई विदेशी दवाब नहीं

नईदिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के संबंध में विपक्ष द्वारा लगाए गए विदेशी दबाव के आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निर्णय किसी भी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। यूपीआई से संबंधित नीतिगत निर्णय भारत द्वारा अपने स्तर पर लिए जाते हैं और किसी भी विदेशी दबाव से प्रभावित नहीं होते हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती बनाना है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने, दुकानों पर भुगतान करने और QR कोड स्कैन करके भुगतान करने पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, लेन-देन की राशि चाहे कितनी भी हो, व्यक्ति से व्यक्ति को होने वाले हस्तांतरण हमेशा निःशुल्क रहेंगे।

नई व्यवस्था के तहत, 15 अक्टूबर से शुरू होकर, ₹2,000 से अधिक के कुछ बड़े व्यापारियों के UPI लेनदेन पर 0.4% का मासिक कर शुल्क (MDR) लगाया जाएगा। यह शुल्क व्यापारी द्वारा वहन किया जाएगा, ग्राहक द्वारा नहीं। प्रति लेनदेन अधिकतम MDR ₹300 निर्धारित किया गया है। सरकार के अनुसार, UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक की कमाई करने वाले छोटे व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

2,000 रुपये से कम के व्यापारी भुगतान निःशुल्क रहेंगे। वित्त मंत्रालय का कहना है कि 95% से अधिक व्यापारी भुगतान 2,000 रुपये से कम के होते हैं, इसलिए वे नई एमडीआर प्रणाली से प्रभावित नहीं होंगे। रेलवे, ईंधन, दूरसंचार, बिल भुगतान और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क लगेगा। वहीं, म्यूचुअल फंड और प्रतिभूतियों से संबंधित भुगतानों पर MDR 0.02% होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। मंत्रालय ने कहा है कि बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे मर्चेंट MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, यूपीआई ऐप्स को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

‘UPI को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरूरी बदलाव’

वित्त मंत्रालय ने बताया कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से, यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम, इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणाली बन गई है। अकेले अगस्त 2026 में, UPI पर 24.5 अरब लेनदेन किए गए। सरकार के अनुसार, उच्च मूल्य वाले व्यापारी लेनदेन से प्राप्त संसाधनों का उपयोग डिजिटल भुगतान अवसंरचना और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाएगा ताकि यूपीआई प्रणाली सुरक्षित, टिकाऊ और नई तकनीकों के अनुरूप बनी रहे। इसके अलावा टियर-3 से टियर-6 शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे कारोबारियों को UPI से जोड़ने, जागरूकता बढ़ाने और प्रोत्साहन देने पर भी इन संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

कांग्रेस ने लगाया था आरोप

इस बीच, कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह UPI पर अमेरिकी कार्ड कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में लाभ दिलाने का प्रयास हो सकता है। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इसे नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रंप को खुश करने का निरंतर प्रयास बताया। जयराम रमेश ने सवाल किया कि MDR दर 0.4 प्रतिशत क्यों निर्धारित की गई और क्या इसका डेबिट कार्ड पर लागू MDR से कोई संबंध है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी मांग के आगे झुकते हुए UPI पर शून्य MDR की व्यवस्था खत्म करने का फैसला किया है। अपने दावे के समर्थन में रमेश ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ओर से पहले UPI के मुफ्त होने को लेकर की गई आलोचना का भी हवाला दिया। (एजेंसी)

 

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