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सुपर अल नीनो का कहर: दुनिया में 8.57 लाख मौतों का खतरा, भारत में मार्च बनेगा सबसे जानलेवा?

नई दिल्ली। वैश्विक जलवायु में आ रहे तेज बदलावों और अनियंत्रित तापमान ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। सुपर अल नीनो के कारण विश्व स्तर पर बारिश के सामान्य चक्र में भारी उलटफेर देखा जा रहा है और पारा नए रिकॉर्ड बना रहा है। इस आसन्न खतरे की गंभीरता को मापते हुए शोध संगठन ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ ने एक क्रांतिकारी टूल ‘अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ तैयार किया है। इस अत्याधुनिक ट्रैकर के हालिया विश्लेषण से सामने आया है कि सुपर अल नीनो से पैदा होने वाली जानलेवा गर्मी के चलते दुनिया भर में लगभग 8 लाख 57 हजार लोगों की असामयिक मृत्यु हो सकती है। इनमें से करीब 3 लाख 73 हजार मौतें केवल आगामी छह महीनों की अवधि में होने का अनुमान जताया गया है।

जानलेवा जोखिमों की पहले से पहचान करेगा ट्रैकर

यह नया डिजिटल ट्रैकर जून माह में अल नीनो के उभार के बाद से तापमान के कारण दर्ज हुई मौतों का ब्योरा रखने के साथ-साथ अगले छह महीनों का संभावित मृत्यु-आंकड़ा भी प्रस्तुत करता है। विभिन्न महाद्वीपों और देशों के प्रांतीय स्तर का डेटा सामने रखकर यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों, सरकारों और नीति-निर्माताओं को सटीक जानकारी देती है कि कौन से क्षेत्र सबसे नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। इस अग्रिम विश्लेषण की मदद से राहत कोषों का सही उपयोग हो सकेगा और सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों में मेडिकल सुविधाएं, पानी और छाया की व्यवस्था कर लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन का कहना है कि यह नया पूर्वानुमान मॉडल उस अत्यंत जटिल सवाल का सीधा उत्तर तलाशता है कि भीषण गर्मी से किन इलाकों में सबसे ज्यादा इंसानी जानें जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि जानलेवा गर्मी के असर को समय से पहले भांप लेना आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे किसी त्रासदी के वास्तविक रूप लेने से पहले ही बचाव के ठोस उपाय जमीन पर उतारे जा सकते हैं।

विकासशील मुल्कों पर टूटेगा कहर, भारत सूची में दूसरे स्थान पर

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के निष्कर्षों से साफ हुआ है कि इस जानलेवा गर्मी की सबसे भारी कीमत विकासशील और घनी आबादी वाले देशों को चुकानी पड़ेगी। आने वाले छह महीनों के दौरान सबसे गंभीर स्थिति नाइजीरिया में बनने का अंदेशा है, जहां अत्यधिक गर्मी के चलते लगभग 56,000 लोग काल के गाल में समा सकते हैं। नाइजीरिया के ठीक बाद इस सूची में भारत का नाम दर्ज है, जहां करीब 55,000 नागरिकों की जान जाने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इस जानलेवा प्रभाव का बड़ा हिस्सा मार्च के महीने में दर्ज होगा जब मौसम अचानक करवट लेगा और गर्मी अपने चरम पर पहुंचेगी।

इसके साथ ही दक्षिण-पूर्व एशिया इस संकट का एक और बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां इंडोनेशिया में लगभग 29,000 मौतें होने की संभावना है। वहीं दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील में भी हर महीने गर्मी से जुड़ी मौतों का ग्राफ सामान्य औसत से कहीं अधिक रहने के संकेत हैं। संस्था ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह मौसमी चक्र समाप्त नहीं हो जाता, तब तक वह हर महीने इस ट्रैकर के आंकड़ों को अपडेट करती रहेगी ताकि दुनिया को तापमान जनित मौतों के बदलते पैटर्न की निरंतर जानकारी मिलती रहे।

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