लालू के दरवाजे पर सोनिया गांधी: क्या नए गठबंधन प्रयोगों से हटकर पुराने फॉर्मूले पर लौटेगी कांग्रेस?
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के राजनीतिक गलियारों में सोमवार सुबह उस समय नई अटकलें शुरू हो गईं, जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी सीधे राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के आवास पर जा पहुंचीं। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक को भले ही बीमारी के बाद का हालचाल जानने की एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के हिसाब से बेहद अहम मान रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस और राजद के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह मुलाकात सिर्फ पुरानी दोस्ती निभाने तक सीमित थी, या फिर विपक्षी खेमे की भविष्य की रणनीति को लेकर कोई नया खाका तैयार किया जा रहा है?
मनमोहन सरकार के दौर की याद दिलाना महज संयोग या सोचा-समझा संदेश?
मुलाकात के फौरन बाद लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया पर इस बैठक की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें तेजस्वी यादव भी साथ खड़े दिखे। लालू यादव ने अपनी पोस्ट में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कामकाज का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में दोनों दलों ने मिलकर मनरेगा, सूचना का अधिकार (RTI) और शिक्षा का अधिकार (RTE) जैसे जनकल्याणकारी कानून लागू किए थे और बिहार के विकास के लिए ₹1.45 लाख करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि दी थी। सवाल उठता है कि मौजूदा विपक्षी गठबंधन की बैठकों के दौर में अचानक यूपीए के पुराने कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने लाने का राजनीतिक मकसद क्या है? क्या राजद और कांग्रेस के पुराने रणनीतिकार यह जताना चाहते हैं कि विपक्ष की असली ताकत पुराने यूपीए मॉडल में ही है?
क्या नए प्रयोगों की विफलता के बाद पुराने दिग्गजों की शरण में है विपक्ष?
हाल के दौर में विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व, सीट शेयरिंग और कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के अंतर्विरोध सामने आते रहे हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर सोनिया गांधी का स्वयं चलकर लालू यादव के घर जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सवाल यह है कि क्या वर्तमान नेतृत्व द्वारा चलाए जा रहे प्रयोगों के बीच सहयोगियों में भरोसा बनाए रखने के लिए सोनिया गांधी को एक बार फिर खुद कमान संभालनी पड़ रही है? लालू प्रसाद यादव हमेशा से कांग्रेस और गांधी परिवार के सबसे मुखर और भरोसेमंद राजनीतिक ढाल रहे हैं, ऐसे में क्या बिखरे हुए विपक्ष को एक सूत्र में पिरोने के लिए सोनिया-लालू की यह पुरानी धुरी दोबारा सक्रिय हो रही है?
सिंगापुर से वापसी और तेजस्वी की मौजूदगी: किस ओर है भविष्य का इशारा?
लालू प्रसाद यादव लंबे अरसे से अस्वस्थ हैं और सिंगापुर में अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के पास रहकर लगातार चिकित्सीय परामर्श ले रहे हैं। स्वास्थ्य की इस कठिन परिस्थिति के बावजूद दिल्ली में उनकी राजनीतिक मौजूदगी और सोनिया गांधी का उनसे संवाद साधना यह साबित करता है कि राष्ट्रीय राजनीति में लालू यादव का प्रभाव आज भी कम नहीं हुआ है। बैठक में तेजस्वी यादव की सीधी मौजूदगी यह भी संकेत देती है कि चर्चा सिर्फ अतीत की यादों तक सीमित नहीं रही होगी, बल्कि आने वाले चुनावी समर और बिहार से लेकर दिल्ली तक के शक्ति-संतुलन पर भी बात हुई होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोनिया और लालू की इस मंत्रणा का असर आने वाले दिनों में संसद और सड़क की राजनीति में नए सिरे से दिखेगा, या यह मुलाकात सिर्फ पुराने दिनों की यादों तक सिमट कर रह जाएगी? सियासी पंडितों की नजरें अब इस बैठक के बाद विपक्षी खेमे में होने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।

