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परिवार को याद कर फूट-फूटकर रोई शेख हसीना, बोलीं- ये वो बांग्लादेश नहीं जिसे हमने बनाया था

 नई दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से दिए गए भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री भावुक हुईं, परिवार को याद किया और दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की बात कही

 

Sheikh Hasina। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी साउथ एशिया) के सर मार्क टुली ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से संबोधन दिया। यह तख्तापलट के दो साल बाद उनका पहला सार्वजनिक मीडिया संबोधन था। कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चला।

 

संबोधन शुरू करते ही शेख हसीना भावुक हो गईं और रो पड़ीं। खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा, “आज मैं सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के तौर पर बात कर रही हूं।” उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को याद किया। इनमें अधिकतर लोगों की हत्या 1975 में ढाका में शेख मुजीबुर रहमान के साथ ही कर दी गई थी।

 

हसीना ने कहा, “बीते दो वर्षों से मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को हालात से जूझते देखा है। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे हमने बनाया था। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी।”

 

 जुलाई-अगस्त 2024 पर बयान

 

उन्होंने कहा, “मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हूं। यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। शुरू से ही मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से इस मुद्दे को शांति से सुलझाने का प्रयास किया। सुधार की बात की आड़ में कुछ संगठित समूह छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश कर रहे थे।”

 

कार्यक्रम में उनके बेटे साजिब वाजेद जॉय भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश आज एक फेल स्टेट है। यह फेलिंग स्टेट नहीं है। यह फेल स्टेट है। यहां मानवाधिकार या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।”

 

वापसी और सजा पर बयान

 

शेख हसीना ने कहा कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है। वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं… लेकिन लोगों का समर्थन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।” उन्होंने आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की। ढाका के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने नवंबर 2025 में उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। हसीना ने इस सजा को अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

 

क्या हुआ था ?

 

5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में छात्रों के आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद छोड़कर भारत पहुंच गई थीं। तब से वे भारत में हैं। यह कार्यक्रम तख्तापलट की दूसरी बरसी पर आयोजित किया गया था। एफसीसी साउथ एशिया ने इसे निजी मीडिया कार्यक्रम बताया। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से स्पष्टीकरण मांगा था और अपने मीडिया को हसीना के बयान प्रसारित न करने की सलाह दी थी।

 

2024 में आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था। बाद में यह सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों मौतों का उल्लेख है। हसीना ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार ने शुरू से शांतिपूर्ण समाधान का प्रयास किया था।

 

संबोधन में हसीना ने कहा, “हमने इस देश को आजाद करवाया था। बांग्लादेश को सुलह, संवैधानिक अधिकार, न्याय और लोकतंत्र की जरूरत है।” उन्होंने पिछले दो वर्षों में देश की स्थिति पर अपनी टिप्पणी की और कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे उन्होंने बनाया था।

 

यह संबोधन ऑडियो के माध्यम से दिया गया। कार्यक्रम में आवामी लीग के अन्य नेता भी शामिल हुए। शेख हसीना ने दो साल के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी और जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं, परिवार के सदस्यों तथा बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर अपने बयान दिए।

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