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Shardiya Navratri 2026: इस दिन से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और राहुकाल का समय

इस साल Shardiya Navratri की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ शुरू होने वाले इस पावन पर्व को लेकर श्रद्धालु माता दुर्गा के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) कर मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) की रात 8:32 बजे से शुरू हो जाएगी, जिसका मान 11 अक्टूबर (रविवार) को पूरे दिन रहेगा।

  • अभिजीत मुहूर्त: 11 अक्टूबर को सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। इस समय कलश स्थापना करना सबसे उत्तम माना गया है।
  • दिनभर घटस्थापना: यदि अभिजीत मुहूर्त चूक जाए, तो श्रद्धालु पूरे दिन भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
  • राहुकाल (सावधानी): रविवार को शाम 4:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समय के दौरान कलश स्थापना या कोई भी शुभ कार्य करने से बचें।

घटस्थापना या कलश स्थापना की सही विधि

  • स्थान शुद्धि: सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से छिड़क कर पवित्र कर लें और हल्दी से अष्टदल बनाएं।
  • जौ बोना: एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं।
  • कलश तैयारी: मिट्टी या तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसके ऊपरी हिस्से में मौली बांधें।
  • सामग्री डालना: लोटे में साफ जल भरकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाएं। इसके बाद जल में सिक्का, हल्दी की गांठ, सुपारी, अक्षत, दूर्वा, फूल और इलायची डालें।
  • नारियल स्थापना: कलश के ऊपर पांच प्रकार के पत्ते (जैसे आम या अशोक के पत्ते) रखें और उसे ढक्कन से ढक दें। इसके बाद एक नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर उसे कलश के ऊपर स्थापित करें।

पहला उपाय:

नवरात्रि के पहले दिन नियमपूर्वक दुर्गा चालीसा का पाठ करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है।

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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