Wed. Sep 9th, 2026

सागर शराब कांड: 15 या 19 मौतें? दिग्विजय सिंह का आरोप- ‘मंत्री समर्थकों ने बांटी जहरीली शराब’

भोपाल/सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले ने अब प्रशासनिक विरोधाभास और गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में उस समय नया मोड़ आ गया जब स्थानीय प्रशासन द्वारा 15 मौतों की पुष्टि के बीच राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने सोशल मीडिया पर 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक कर दिए। वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के समर्थकों और शराब सिंडिकेट की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।

प्रशासन और मंत्री के आंकड़ों में अंतर से उठे सवाल

सागर जिला प्रशासन द्वारा अब तक इस हादसे में कुल 15 लोगों की मौत की बात कही जा रही थी। हालांकि, पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल के आधिकारिक बयान ने प्रशासनिक रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए 19 मृतकों के नाम साझा किए, जिनमें दिग्विजय लोधी, करतार सिंह लोधी, राजेन्द्र सिंह लोधी, कम्मू अहिरवार, चमन सिंह, उजायर सिंह, गोविंद उर्फ नीलेश, देश कुमार, भोपाली आदिवासी, अनाद रावत, कृष्ण कुमार लोधी, भगवान सिंह लोधी, सचिन उर्फ सत्येंद्र सिंह, राजकुमार, कैलाश, रौशन, हरनाम, गोविन्द और राम सिंह शामिल हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबल योजना के तहत पात्र पंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि अन्य मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी।

दिग्विजय सिंह के तीखे आरोप: सिंडिकेट से मंत्री के रिश्तों पर सवाल

मामले को लेकर भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रेस और सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध और जहरीली शराब के नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। दिग्विजय सिंह ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ आरोपियों की कथित तस्वीरें साझा करते हुए पूछा कि इस गठजोड़ पर शासन क्या रुख अपनाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि शराब के अवैध कारोबार से जुड़ी कंपनी ‘KSR ग्रुप’ ने क्षेत्र में मंत्री के प्रचार वाले होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए थे।

प्रशासनिक दावों और कैबिनेट मंत्री की सार्वजनिक सूची के बीच के इस अंतर के बाद विपक्षी दलों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने और अवैध शराब के नेटवर्क पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।

About The Author