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कागजी नोटों का दौर होगा खत्म? पानी और पसीने से नहीं गलेंगे नए पॉलीमर नोट, तीन दिग्गज कंपनियों ने लगाई बोली

नई दिल्ली। भारतीय बाजार में रोजमर्रा के लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले कागजी नोट जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक पारंपरिक सूती और कागजी मुद्रा की जगह अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ पॉलीमर यानि प्लास्टिक नोट लाने की दिशा में ठोस कदम उठा चुका है। रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) द्वारा जारी किए गए टेंडर में एक भारतीय और दो वैश्विक कंपनियों ने अपनी तकनीकी और वित्तीय बोलियां पेश कर दी हैं।

चीन-पाक से दूरी और एनिमल फैट पर बैन

टेंडर में शामिल होने वाली सभी कंपनियों को कानूनी हलफनामा देना होगा कि भारत में उनके मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई ऑपरेशन्स का चीन या पाकिस्तान में स्थित उनकी किसी भी गतिविधि या यूनिट से कोई संबंध नहीं रहेगा।

कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि सप्लाई की जाने वाली पॉलीमर शीट्स में किसी भी जानवर की चर्बी या उसके DNA का अंश नहीं है। ब्रिटेन में जब पॉलीमर नोट जारी हुए थे, तब पशु चर्बी के उपयोग को लेकर बड़ा विवाद हुआ था, इसी से सबक लेते हुए भारत ने शुरुआत में ही इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

68,000 रीम पॉलीमर शीट की मांग, अलग-अलग मौसम में होगा टेस्ट

बैंक नोटों की प्रिंटिंग के लिए BRBNMPL को तत्काल 68,000 रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की जरूरत है। एक रीम में 500 पॉलीमर शीट्स शामिल होती हैं। कंपनियों को पहले अपने मटीरियल के सैंपल्स जमा करने होंगे। भारत की अत्यधिक गर्मी, बरसात, उमस और कड़ाके की ठंड वाले अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन शीट्स की मजबूती की जांच की जाएगी।

रेस में शामिल ये तीन दिग्गज कंपनियां

पॉलीमर शीट सप्लाई के इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए तीन प्रमुख दावेदार सामने आए हैं:

कॉस्मो फर्स्ट और डी ला रू (Cosmo First & De La Rue): भारत की प्रमुख बीओपीपी निर्यातक ‘कॉस्मो फर्स्ट’ ने यूके की विख्यात बैंक नोट निर्माता ‘De La Rue’ के साथ हाथ मिलाया है, जो सुरक्षा फीचर्स और पॉलीमर सबस्ट्रेट तकनीक उपलब्ध कराएगी।

सीसीएल सिक्योर (CCL Secure): ऑस्ट्रेलिया की यह दिग्गज कंपनी दुनिया भर के 40 से अधिक केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर करेंसी तकनीक दे रही है। कंपनी का दावा है कि उसके नोट पारंपरिक कॉटन नोटों की तुलना में 6 गुना ज्यादा चलते हैं।

क्यूएंडटी हाई-टेक पॉलीमर (Q&T High-Tech): वियतनाम की इस कंपनी ने अपने देश में कॉटन नोटों के मुकाबले 78% लागत की बचत करने का दावा करते हुए भारतीय टेंडर में बोली लगाई है।

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