चंपत राय पर 50 करोड़ की मंदिर संपत्ति और 250 बीघा जमीन हड़पने का आरोप
Champat Rai
अयोध्या : अयोध्या में मंदिर संपत्ति और राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को दो अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोप सामने आए, जिनमें विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता चंपत राय, कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
समाजवादी पार्टी मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राम निवास धाम मंदिर से जुड़े हरिशंकर सफरीवाला ने आरोप लगाया कि वर्ष 1987 में पंजीकृत राम निवास धाम मंदिर को पुजारी के माध्यम से मंदिर समिति की जानकारी और सहमति के बिना अपने कब्जे में लिया गया। उनका दावा है कि मंदिर की संपत्ति का 5 करोड़ 80 लाख रुपये में सौदा किया गया, जिसमें 60 लाख रुपये अग्रिम देकर कब्जा हासिल किया गया।
हरिशंकर सफरीवाला के अनुसार, मंदिर की लगभग 250 बीघा जमीन और करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति पर जबरन कब्जा कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर का चढ़ावा, मूर्तियां, सिंहासन, पलंग और अन्य मूल्यवान सामान भी अपने कब्जे में ले लिया गया। उनका कहना है कि मंदिर समिति द्वारा सामान का हिसाब और रसीदें मांगे जाने के बावजूद कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अयोध्या में धर्म के नाम पर लूट होने का भी आरोप लगाया।
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हरिशंकर सफरीवाला द्वारा लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर भी उसी गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, जैसी राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े अन्य मामलों पर हो रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए।
इसी बीच राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पाटिल ने उत्तर प्रदेश एसआईटी को शिकायत सौंपते हुए कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण, VHP नेता गोपाल और उनके सहयोगी सतीश नौबड़े के खिलाफ जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण अभियान के दौरान चंदा संग्रह में अनियमितताएं हुईं और संबंधित लोगों ने कथित तौर पर चंदे की राशि से बेहिसाब संपत्ति अर्जित की। शिकायतकर्ता ने एसआईटी से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और कथित बेनामी संपत्तियों की भी जांच करने की मांग की है।

