PoK Protest: पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज, प्रदर्शनकारियों ने भारत से समर्थन की अपील की
JAAC नेता सरदार अमन खान ने वीडियो संदेश जारी कर श्रीनगर, जम्मू, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों से समर्थन मांगा, पाकिस्तान पर दमन और फायरिंग के आरोप
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे पिछले 26 दिनों से अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमन खान ने एक वीडियो संदेश जारी कर अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने और भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से समर्थन की अपील की है।
वीडियो संदेश में सरदार अमन खान ने श्रीनगर, राजौरी, जम्मू, लद्दाख, करगिल और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि PoK में लोगों को अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने पर दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में खाद्य सामग्री, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है तथा लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक जनसभा के दौरान सरदार अमन खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ने को लेकर लोगों से राय मांगी, जिस पर वहां मौजूद लोगों ने समर्थन जताया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच PoK से एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रविवार तड़के फज्र की नमाज के समय रावलकोट के ईदगाह मैदान के आसपास पाकिस्तानी रेंजर्स और स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए फायरिंग की। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में 11 लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हाल के सप्ताहों में महंगाई, खाद्य संकट, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं। समय के साथ आंदोलन ने राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है। पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है।
फिलहाल क्षेत्र से आ रही अधिकांश जानकारी स्थानीय संगठनों, सोशल मीडिया पोस्ट और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसलिए घटनाओं और दावों की पुष्टि स्वतंत्र स्रोतों या आधिकारिक बयानों के बाद ही संभव होगी।

