प्याज ने फिर निकाले आंसू! कुछ ही दिनों में 94% बढ़े दाम, सरकार की कोशिशें बेअसर
Onion Price Hike: वही प्याज जो रोजमर्रा की सब्जियों का स्वाद बढ़ाता है, आजकल घरेलू बजट बिगाड़ रहा है। अगर आप बाजार से प्याज खरीदने जाते हैं, तो कई जगहों पर आपको 60-70 रुपये प्रति किलो तक देने पड़ते हैं, जबकि सरकार का दावा है कि वह बफर स्टॉक से प्याज सिर्फ 35 रुपये प्रति किलो बेच रही है। इसका मतलब है कि सरकारी कीमत और खुले बाजार की कीमत में लगभग दोगुना अंतर है। 16 सितंबर को देशभर में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 53.84 रुपये प्रति किलो था, जो एक साल पहले के 27.71 रुपये प्रति किलो से लगभग 94 प्रतिशत अधिक है।
सरकार ने 24 अगस्त से बाजार में प्याज का बफर स्टॉक जारी करना शुरू कर दिया। मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखे गए इस स्टॉक से प्याज राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (एनएएफईडी), केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन के माध्यम से ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। हालांकि, समस्या यह है कि सरकार द्वारा आपूर्ति किया गया प्याज हर बाजार और हर उपभोक्ता तक नहीं पहुंच पा रहा है। उत्पादक राज्यों से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक अतिरिक्त भंडार का परिवहन एक चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि जहां सरकारी स्तर पर प्याज की बिक्री वर्तमान में ₹35 प्रति किलोग्राम है, वहीं खुले बाजार में लोगों को काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
एक साल में लगभग दोगुने हुए दाम
प्याज की महंगाई का असर आंकड़ों में साफ तौर पर दिखाई देता है। 16 सितंबर को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये प्रति किलो था। पिछले साल इसी दिन औसत खुदरा भाव 27.71 रुपये प्रति किलो था। इसका मतलब है कि सिर्फ एक साल में प्याज की कीमत में करीब 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। थोक बाजार में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। 16 सितंबर को प्याज का औसत थोक भाव 45.65 रुपये प्रति किलो था। इससे पता चलता है कि थोक बाजार से खुदरा बाजार तक कीमतों का दबाव बना हुआ है।
केंद्र ने 19 शहरों तक बढ़ाई सप्लाई
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ा दी है। यह अभियान अब तक 19 शहरों तक पहुंच चुका है। प्याज उत्पादन क्षेत्रों से प्रमुख शहरों तक पहुंचाने के लिए “कंडा एक्सप्रेस”, रेलगाड़ियों और 30 से अधिक ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि कुछ बाजारों में बफर प्याज की बिक्री के परिणाम दिखने लगे हैं। हालांकि, आम उपभोक्ता को असली राहत तभी मिलेगी जब सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर प्याज अधिक बाजारों में आसानी से उपलब्ध होगा।
प्याज इतनी महंगा क्यों हुई?
प्याज की कीमतों में वृद्धि के पीछे मौसमी कारक भी हैं। रबी फसल के प्याज का भंडार धीरे-धीरे कम होता जाता है, जबकि अगली खरीफ फसल को बाजार में आने में समय लगता है। रबी और खरीफ की कटाई के बीच का यह समय आमतौर पर प्याज के लिए महंगा माना जाता है। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सितंबर से दिसंबर तक इस “कम उत्पादन वाले मौसम” के दौरान कीमतों में अचानक वृद्धि को रोकने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ा दी जाती है।

खरीफ फसल की बुआई में हुई देरी
इस साल खरीफ प्याज की बुवाई को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार ने जुलाई में बताया कि महाराष्ट्र के नासिक में बुवाई लगभग 15 दिन पीछे चल रही है। वहीं, कर्नाटक के चित्रदुर्गा-चलकेरे क्षेत्र में बुवाई सामान्य स्तर से लगभग 60% ही होने का अनुमान है। इसका सीधा असर नई फसल के आने पर पड़ सकता है। अगर खरीफ प्याज बाजारों में देर से पहुंचता है, तो इससे रबी प्याज के पुराने स्टॉक पर दबाव पड़ सकता है।
मौसम और बाजार की चाल ने बढ़ाई चिंता
प्याज की कीमतें केवल बुवाई और स्टॉक पर निर्भर नहीं करतीं। मौसम भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार ने पहले कहा था कि मानसून में देरी और उससे संबंधित परिस्थितियों ने प्याज की कीमतों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि कुछ व्यापारियों द्वारा सट्टेबाजी के लिए की गई खरीदारी ने बाजार की भावना को प्रभावित किया है। इसलिए, वास्तविक आपूर्ति के साथ-साथ बाजार की भावना भी कीमतों को प्रभावित कर रही है।
देश में प्याज की कमी नहीं, फिर दाम क्यों बढ़े?
सरकार का कहना है कि देश में प्याज की कोई कमी नहीं है। अनुमान है कि 2025-26 में प्याज का उत्पादन 30.737 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा, जबकि पिछले वर्ष यह 30.767 मिलियन टन था। जुलाई में सरकार के अनुमानों के अनुसार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। इसका मतलब है कि चुनौती केवल कुल उत्पादन की नहीं है, बल्कि इस बात की भी है कि प्याज कब, कहां और कितनी मात्रा में आ रहा है।
बफर स्टॉक कितना और सरकार क्या कर रही?
सरकार ने 2026-27 के लिए बफर के तौर पर 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। इसमें से लगभग 1.21 लाख टन प्याज की खरीद हो चुकी है। बफर के लिए खरीद मूल्य भी 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि सरकार अब रबी प्याज लगभग 21.25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रही है। इस बफर का उद्देश्य बाजार में नई फसल की आवक कम होने और कीमतें बढ़ने पर सरकारी भंडार का उपयोग करके आपूर्ति बढ़ाना है।(एजेंसी)

