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‘घंटा’ शब्द पर भड़का सियासी तूफान: विजयवर्गीय के तंज पर रागिनी नायक का तीखा प्रहार, इंदौर में राहुल के दौरे से पहले संग्राम!

इंदौर। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल की राजनीतिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। दौरे से पूर्व ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच शब्दों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा राहुल गांधी के आगमन पर कसे गए तंज के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पलटवार किया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘घंटा’ शब्द चर्चा के केंद्र में आ गया है।

‘भाजपा को घंटा फायदा होगा’-रागिनी नायक का तीखा जवाब

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी के दौरे पर चुटकी ली थी और कहा था कि उनके आने से केवल कांग्रेस को ही लाभ मिलेगा, भाजपा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने विजयवर्गीय की शैली में ही जवाब दिया और कहा, “भाजपा को घंटा फायदा होगा।” उन्होंने भाजपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए नसीहत दी कि दूसरों पर राजनीतिक टिप्पणी करने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। कांग्रेस का यह तेवर साफ संकेत दे रहा है कि वह भाजपा के हर वार का जवाब उसी की आक्रामक भाषा में देने को तैयार है।

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से भाजपा में घबराहट का आरोप

राहुल गांधी इंदौर में युवाओं और छात्र वर्ग से सीधे संवाद के लिए आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिरकत करने वाले हैं। कांग्रेस इस आयोजन को प्रदेश में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और छात्र हितों से जुड़े मसलों पर एक बड़े जनसंवाद के रूप में देख रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इस कार्यक्रम की तैयारियों और युवाओं के संभावित समर्थन को देखकर भाजपा नेतृत्व में असहजता है, जिसके चलते दौरे से पहले ही इस प्रकार की बयानबाजी कर ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

राजनीतिक तल्खी के बीच इंदौर का माहौल गर्म

कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और तीखे बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस ने भी उसी अंदाज में जवाब देकर मुकाबला बराबरी पर ला खड़ा किया है। राहुल गांधी के इस दौरे से आगामी राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, इसका फैसला तो जनता और समय करेगा, लेकिन फिलहाल इंदौर में राहुल गांधी के कदम रखने से पहले ही दोनों दलों के बीच का सियासी तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है।

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