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MP कैबिनेट के बड़े फैसले: कम बारिश वाले जिलों पर विशेष फोकस, विकास मद में दिए 3,378 करोड़ रुपये

भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल मॉनसून की बेरुखी झेल रहे किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 12 अल्पवर्षा वाले जिलों की जमीनी स्थिति पर गहन मंथन किया गया। सरकार ने इन जिलों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों को विशेष आर्थिक सहायता पहुंचाने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए अरबों रुपये के वित्तीय प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है।

12 जिलों में सूखे के हालात, पेयजल और फसल सुरक्षा पर विशेष जोर

राज्य के कई हिस्सों में इस वर्ष सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते आगामी महीनों में जल संकट और रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। कैबिनेट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार अलीराजपुर जिले में सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जो पूरे प्रदेश में सबसे गंभीर स्थिति है। इसके अतिरिक्त इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, झाबुआ, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, शाजापुर और पांढुर्ना जिलों में भी सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। कैबिनेट ने तय किया है कि इन क्षेत्रों में भूजल स्तर और जलाशयों की स्थिति पर पैनी नजर रखी जाएगी तथा किसानों के नुकसान का जिला स्तर पर सटीक आकलन कर विशेष राहत पैकेज धरातल पर उतारा जाएगा।

क्षेत्रीय विकास के लिए ₹3,378 करोड़ और EOW को ₹345 करोड़ की मंजूरी

राज्य के बुनियादी ढांचे और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने सागर, छिंदवाड़ा, सिवनी और मुरैना जिलों से संबंधित परियोजनाओं के लिए 3,378 करोड़ रुपये का प्रावधान मंजूर किया है। वहीं भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को 345 करोड़ रुपये का विशेष बजट स्वीकृत किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि नगरीय निकायों में पारदर्शिता लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक निगरानी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से लापरवाही और गड़बड़ी के मामलों में 392 लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

माटी कला और स्थानीय कारीगरों को संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों की अपील

दीपावली के आगामी पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पारंपरिक कारीगरों और कुम्हारों के उत्थान पर विशेष बल दिया। सभी कैबिनेट मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर स्थानीय मिट्टी शिल्प को बढ़ावा देने और जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे कुम्हारों द्वारा निर्मित मिट्टी के दीयों और स्वदेशी सजावटी सामानों को प्राथमिकता दें, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिल सके।

स्थापना दिवस, जनजातीय गौरव और सेवा संकल्प अभियान की समीक्षा

बैठक के दौरान प्रदेश भर में संचालित सेवा संकल्प अभियान की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया गया, जिसके तहत 1,345 सेवा शिविर और 1,600 से अधिक सेवा ज्योति यात्राओं के माध्यम से जनसमस्याओं का निराकरण किया गया। इसके अतिरिक्त 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती, 1 नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस और 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले प्रदेशव्यापी कार्यक्रमों की रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया गया।

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