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ओलंपिक के बाद एशियन गेम्स में भी Mirabai Chanu का कमाल, सिल्वर जीतकर रचा इतिहास

ओलंपिक मेडलिस्ट Mirabai Chanu ने आखिरकार एशियाई खेलों के अपने लंबे सूखे को खत्म कर ही दिया! उत्तर कोरियाई धुरंधर को कड़ी टक्कर देकर उन्होंने वह कर दिखाया जिसका इंतजार पूरा देश 26 साल से कर रहा था। आखिर कैसे पलटी बाजी और क्या है इस ऐतिहासिक जीत की पूरी कहानी? आइए जानते हैं…

भारत की स्टार वेटलिफ्टर और तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्होंने एशियाई खेलों में पदक न जीत पाने के अपने लंबे इंतजार को आखिरकार खत्म कर दिया है। प्रतियोगिता के दौरान मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लिन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाया, जिससे उनका कुल स्कोर 198 किलोग्राम रहा।

जीत की पूरी कहानी और आंकड़े

यह 1998 में महान भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी के कांस्य पदक के बाद, एशियाई खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में भारत का पहला पदक है। इस प्रतियोगिता में उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सोंग गम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाया और स्वर्ण पदक जीतकर एशियाई खेलों में अपनी खिताबी हैट्रिक पूरी की। मीराबाई ने शुरुआत में स्नैच चरण में अपने प्रयासों के दौरान 83 किलोग्राम, 85 किलोग्राम और फिर 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने क्लिन एंड जर्क राउंड में 111 किलोग्राम का बेहतरीन भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक पक्का किया। इससे पहले उन्होंने दो बार एशियाई खेलों में भाग लिया था लेकिन वह पदक जीतने में सफल नहीं हो पाई थीं। अपने इस शानदार प्रदर्शन के साथ मीराबाई ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप के बाद अब एशियाई खेलों के मंच पर भी अपना दबदबा साबित कर दिया है।

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