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85 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 9 ठिकानों पर छापेमारी

बिहार : प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने शुक्रवार को बैंक धोखाधड़ी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कई राज्यों में एक साथ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। पटना स्थित ED की टीम गया की रमनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड से जुड़ी नौ जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जो बिहार, दिल्ली और गुरुग्राम में फैली हुई हैं। जांच में बैंकों से लिए गए करोड़ों रुपये के लोन को दूसरी जगह लगाने और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। वहीं कोलकाता जोनल कार्यालय की टीम SREI समूह से जुड़े कथित लोन घोटाले में ARSS तथा AMR समूह के परिसरों की भी तलाशी ले रही है।

गया के होटल समूह पर ED का शिकंजा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पटना यूनिट ने बिहार के गया जिले से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले में ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) की धारा 17 के तहत छापेमारी शुरू की है। यह कार्रवाई ‘रामनांदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड’ (RHRL) और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर की जा रही है। ED के मुताबिक, कंपनी को अखौरी गोपाल और उनके बेटे निशांत और नितेश कंट्रोल करते थे। जांच में पता चला है कि कंपनी को कई बैंकों के एक ग्रुप (कंसोर्टियम) से लगभग ₹85 करोड़ का लोन दिया गया था।

₹58 करोड़ का गबन करने का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि लोन की रकम में से लगभग ₹58 करोड़ का इस्तेमाल उस मकसद के अलावा किसी और काम के लिए किया गया, जिसके लिए वह लिया गया था। ED के मुताबिक, ये फंड कथित तौर पर प्रोजेक्ट पूरा होने की झूठी और जाली रिपोर्ट के आधार पर हासिल किए गए थे। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट पूरा होने की रिपोर्ट कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने जमा की थी, जिससे लोन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

गिरवी संपत्तियां बेचने का भी आरोप

जांच में यह भी पता चला है कि लोन के लिए कई संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। खबरों के मुताबिक, इनमें से पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स लिमिटेड के पक्ष में गिरवी रखी गई थीं। ED का आरोप है कि बाद में इन गिरवी रखी गई संपत्तियों को बेच दिया गया। एजेंसी को शक है कि बिक्री की जो कीमत बताई गई, वह असल मार्केट वैल्यू से काफी कम थी और बिक्री से मिली रकम को कागजों में कैश रसीद के तौर पर दिखाया गया था। जांच एजेंसी की नजर कुछ खरीदारों पर भी है। ED का मानना ​​है कि इनमें से कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीद सकें। इसलिए, शक है कि वे बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार हो सकते हैं।

131 करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई गई अपराध राशि

CBI की चार्जशीट के अनुसार, इस कथित अपराध में शामिल कुल रकम NPA वैल्यू के हिसाब से लगभग ₹131.79 करोड़ है। ED को शक है कि जांच शुरू होने से पहले ही संपत्ति को ठिकाने लगाने की कोशिशें की गई थीं। अभी कुल नौ जगहों पर तलाशी ली जा रही है, जिनमें गया (बिहार) में छह, गुरुग्राम में दो और नई दिल्ली में एक जगह शामिल है।

ARSS और AMR समूह के खिलाफ भी कार्रवाई

इस बीच, ED के कोलकाता ज़ोनल ऑफ़िस ने एक और बड़े मामले में तलाशी अभियान शुरू किया है। यह कार्रवाई SREI इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड और SREI इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड से कथित तौर पर धोखाधड़ी से लिए गए लोन और उनके रीपेमेंट में हुई गड़बड़ियों से जुड़ी है। जांच के दायरे में ओडिशा स्थित ARSS समूह के पूर्व प्रमोटर और निदेशक परिवार के सदस्य अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और सुभाष अग्रवाल से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा AMR और AMRL समूह तथा उसके प्रमोटर महेश कुमार रेड्डी अल्थुरु से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली जा रही है।

फंड डायवर्जन और राउंड-ट्रिपिंग का शक

ED को लोन की रकम के इस्तेमाल में वित्तीय गड़बड़ियों जैसे लोन एवरग्रीनिंग, फंड डाइवर्जन और राउंड-ट्रिपिंग का शक है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अलग-अलग कंपनियों और अकाउंट्स के जरिए फंड को घुमाकर असली वित्तीय स्थिति को छिपाया गया था। अभी कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में ED की तलाशी की कार्रवाई चल रही है। एजेंसी दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, एसेट्स और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है। (एजेंसी)

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