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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ व्रत की संपूर्ण विधि, सरगी से लेकर चंद्र अर्घ्य तक, जानें हर एक स्टेप की पूरी जानकारी

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का पावन पर्व पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला यानी बिना पानी के उपवास रखती हैं। इस व्रत की शुरुआत सुबह की सरगी से होती है और इसका समापन रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर होता है। आइए जानते हैं करवा चौथ व्रत की संपूर्ण और क्रमबद्ध विधि:

पहला स्टेप: सरगी और व्रत का संकल्प

करवा चौथ व्रत की शुरुआत सुबह सरगी के साथ होती है और तड़के ब्रह्म मुहूर्त का समय सरगी के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। सूरज निकलने से पहले सास द्वारा दी गई सरगी खाई जाती है, जिसमें फल, मिठाइयां, मेवे, फेनी और सुहाग की वस्तुएं शामिल होती हैं। सरगी ग्रहण करने और पानी पीने के बाद महिलाएं पूरे दिन के लिए निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं और इसके बाद सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है।

दूसरा स्टेप: सोलह श्रृंगार और पूजा की तैयारी

इस दिन सुहागिनों के लिए सोलह श्रृंगार करना बेहद शुभ माना जाता है, इसलिए महिलाएं नए वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और पूर्ण रूप से सजती-संवरती हैं। दिन के समय ही घर के मंदिर या किसी साफ-सुथरे स्थान पर चौकी सजाई जाती है। इस चौकी पर माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी, कार्तिकेय जी और करवा माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित की जाती है।

तीसरा स्टेप: संध्या पूजन और कथा श्रवण

शाम को शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से शिव परिवार और करवा माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान महिलाएं एक-दूसरे को करवा चौथ की व्रत कथा सुनाती और सुनती हैं। इस दौरान करवों का आदान-प्रदान यानी करवा बदलने की परंपरा भी निभाई जाती है। यदि सामूहिक पूजा न हो, तो महिलाएं माता गौरी के सामने ही बैठकर विधिपूर्वक करवा बदलती हैं।

चौथा स्टेप: चंद्रमा को अर्घ्य और दर्शन

रात में चंद्रोदय होने के बाद पूजा की थाली तैयार की जाती है, जिसमें दीया, रोली, अक्षत, जल से भरा करवा, मिठाई और छलनी रखी जाती है। सबसे पहले छलनी में जलता हुआ दीया रखकर चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं और फिर उसी छलनी की ओट से महिलाएं अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चंद्र देव को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है।

पांचवां स्टेप: व्रत का पारण और बायना

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने पति के हाथों से पानी पीकर और मिठाई खाकर अपना उपवास खोलती हैं। इसके बाद घर के बड़ों और पति के चरण छूकर आशीर्वाद लिया जाता है और सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। अंत में अपनी सास या किसी योग्य बुजुर्ग महिला को फल, मिठाई, वस्त्र और दक्षिणा से युक्त बायना देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

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