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कोविड लॉकडाउन में पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई, झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान झारखंड के विभिन्न जिलों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की जांच की धीमी प्रगति पर एक बार फिर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा कि चार साल बीत जाने के बावजूद जांच पूरी क्यों नहीं हुई है और सीआईडी ​​को सौंपी गई यह जांच किस चरण में है।

झारखंड में पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

मंगलवार को सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह भी सवाल उठाया कि सीआईडी ​​की जांच फिलहाल पलामू जिले के पांकी क्षेत्र तक ही सीमित क्यों दिखाई दे रही है, जबकि याचिका में राज्य के कई जिलों में वृक्षों की कटाई का आरोप लगाया गया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच सीआईडी ​​को सौंप दी, लेकिन जांच बहुत धीमी गति से चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में शामिल लोगों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अदालत ने सरकार से कथित “बड़ी साजिश” पर विस्तृत जवाब भी मांगा। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

झारखंड में बड़े पैमाने पर हुई थी पेड़ों की कटाई

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का खुलासा हुआ है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है और एक अन्य आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। सीआईडी ​​इस मामले में पलामू जिले में दर्ज दो एफआईआर की जांच कर रही है।

कोविड लॉकडाउन के दौरान हुई थी पेड़ों की कटाई

झारखंड उच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाईयों में जांच में हुई देरी पर कड़ा रुख अपनाया था। न्यायालय ने कहा था कि यह देरी एक गंभीर मामला है और मात्र दस्तावेजों की मांग से देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और रांची सहित कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। आरोप है कि कटे हुए पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजा गया। मामला सामने आने के बाद विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसकी जांच अब भी सीआईडी के जिम्मे है। (एजेंसी)

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