ISRO Gaganyaan: ISRO का बड़ा ऐलान, अब आम नागरिक भी जा सकेंगे अंतरिक्ष, गगनयान मिशन में मिलने जा रहा है सुनहरा मौका
ISRO Gaganyaan: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। अब तक अंतरिक्ष का सपना केवल वायुसेना के फाइटर पायलटों तक ही सीमित माना जाता था, लेकिन अब इसरो ने अपने एस्ट्रोनॉट कैडर के दरवाजे आम नागरिकों के लिए भी खोल दिए हैं। इस पहल के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो आम लोगों को अंतरिक्ष भेजने की क्षमता रखते हैं।
STEM विशेषज्ञों को मिलेगी प्राथमिकता
इसरो की एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन कमेटी ने सिफारिश की है कि गगनयान मिशन के आगामी चरणों में विविधता को बढ़ावा दिया जाए। योजना के अनुसार, भविष्य के बैचों में वायुसेना के पायलटों के साथ चार ऐसे नागरिकों को शामिल किया जाएगा, जो STEM (Science, Technology, Engineering, and Math) के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हों। इनका मुख्य कार्य अंतरिक्ष में जाकर जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी शोध को अंजाम देना होगा।
कठिन होगी ट्रेनिंग: 54 महीने का कड़ा सफर
एस्ट्रोनॉट बनना कोई आसान काम नहीं है। एक आम नागरिक को अंतरिक्ष यात्री के रूप में तैयार करने के लिए इसरो ने एक विस्तृत रोडमैप बनाया है:
- ट्रेनिंग का समय: चयन से लेकर मिशन के लिए तैयार होने तक करीब 54 महीने (साढ़े चार साल) का समय लगेगा।
- शारीरिक और मानसिक परीक्षा: उम्मीदवारों को शारीरिक फिटनेस, तकनीकी दक्षता और दबाव झेलने की कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
- भविष्य की तैयारी: इसरो का लक्ष्य अगले 72 से 96 महीनों में दूसरे और तीसरे बैच को पूरी तरह तैयार करने का है।
चौथे मिशन से शुरू होगी नागरिकों की यात्रा
भले ही नागरिकों को जल्द ही ट्रेनिंग बैच में शामिल कर लिया जाएगा, लेकिन उनकी वास्तविक अंतरिक्ष यात्रा चौथे मानव मिशन से शुरू होगी। इसरो की सुरक्षा नीति के अनुसार, शुरुआती मिशनों में केवल मिलिट्री बैकग्राउंड वाले पायलटों को ही भेजा जाएगा। एक बार जब गगनयान की तकनीक पूरी तरह सुरक्षित और परिपक्व साबित हो जाएगी, तब सिविलियन स्पेशलिस्ट अंतरिक्ष की कक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगे।
40 एस्ट्रोनॉट्स का बनेगा विशाल ‘पूल’
इसरो अब एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भविष्य की योजनाओं के अनुसार:
भारत हर साल दो मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है।
इस लक्ष्य के लिए कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का एक मजबूत पूल तैयार किया जाएगा।
तीसरे बैच में बड़ा बदलाव होगा, जिसमें 12 सदस्यों में से 10 सदस्य सिविलियन होंगे।
गगनयान 2027: पहला ऐतिहासिक कदम
भारत का पहला मानव मिशन गगनयान 2027 में लॉन्च होने वाला है। इसमें तीन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष की कक्षा में 3 दिन बिताएंगे। पहले बैच के लिए वायुसेना के चार अनुभवी टेस्ट पायलट—प्रशांत नायर, शुभांशु शुक्ला, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप—को चुना गया है, जो वर्तमान में कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

