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कान्हा में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, NTCA से 10 साल के फंड का पूरा हिसाब मांगा

Jabalpur News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की लगातार संदिग्ध मौतों के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA ) से पिछले 10 वर्षों के टाइगर रिजर्व फंड का विवरण मांगा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार की ओर से फंड भी पर्याप्त नहीं मिल रहा है और टागइर रिजर्व में खाली पड़े पदों की भी भर्ती नहीं हो रहा है।

याचिका में अप्रैल में हुई बाघों की मौत में CDV संक्रमण को लेकर भी चिंता जताई गई है और इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की है। उस समय निधियों और संसाधनों का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आएगी। इसमें बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार शावक शामिल हैं। 19 मई को युवा नर बाघ महावीर की मौत हुई। वहीं, बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क बाघ मृत मिले थे। सभी बाघों की मौत मामलों में CDV संक्रमण की आशंका जताई गई।

कुत्तों से फैलने का खतरा

CDV का खतरा यह है कि यह वायरस कुत्तों से वन्यजीवों में फैल सकता है, जिससे बाघों में गंभीर बीमारी और मृत्यु हो सकती है। यदि एक बाघ संक्रमित हो जाता है, तो यह संक्रमण अन्य अन्य टाइगर रिजर्व में भी फैलने का खतरा है।

कुत्तों के वैक्सीनेशन पर कार्रवाई

हाईकोर्ट ने पहले ही कुत्तों को क्वारंटाइन में रखने और उनका टीकाकरण करने का आदेश दिया था। सरकार ने बताया कि लगभग 2,000 आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। बूस्टर खुराक देने की तैयारियां चल रही हैं।

NTCA से पिछले 10 वर्षों का वर्षवार फंड डाटा मांगा

हाईकोर्ट ने एनटीसीए से पिछले 10 वर्षों के अपने फंड का विवरण मांगा है, जिसमें यह भी शामिल है कि प्रत्येक वर्ष यह फंड कहां, कैसे और किस प्रकार खर्च किया गया। इसमें बाघ संरक्षण, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर किए गए व्यय की भी जांच की जाएगी।

बाघों की मौतों पर गंभीर सवाल

कोर्ट में दायर याचिका में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण की संभावना पर चिंता जताई गई है और बाघ संरक्षण एवं निगरानी प्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि अप्रैल और मई के बीच आठ बाघों की मौत हुई थी।याचिका के अनुसार अप्रैल 2026 में कान्हा में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार अर्धवयस्क शावकों की मौत हुई। मौत से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में गिरावट देखी गई थी। इसके बाद युवा नर बाघ महावीर की भी 19 मई 2026 को मौत हो गई। उसकी मौत का संभावित कारण भी कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बताया गया। इसी अवधि में बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क नर बाघ भी मृत पाए गए। याचिका में दावा किया गया है कि करीब एक महीने के भीतर अकेले कान्हा टाइगर रिजर्व में आठ बाघों की मौत हुई।

अन्य टाइगर रिजर्व पर भी चिंता

याचिकाकर्ता ने राज्य भर में निगरानी बढ़ाने की मांग की है, जिसमें सभी बाघ अभ्यारण्यों में टीकाकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना शामिल है। हाईकोर्ट ने भी इस संबंध में सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है।याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा प्रदेश के दूसरे टाइगर रिजर्व तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में केवल कान्हा में उपाय करना पर्याप्त नहीं होगा। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी मुद्दा उठाया गया कि टाइगर रिजर्व में कई पद लंबे समय से खाली हैं और पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इससे बाघों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

खाली पदों पर भी सख्ती

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अंशुमन सिंह और प्रतीक रूसिया ने टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों को भरने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों को भरने के संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद राज्य के टाइगर रिजर्व में पद रिक्त बने हुए हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएं।

 

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