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Guru Purnima 2026: “गुरु तत्व ही आदि, गुरु तत्व ही अनंत”! जान लें, गुरु पूर्णिमा पर यह छोटी सी चूक भी कर देगी पूजा निष्फल!

Guru Purnima 2026: आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि यानी ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र और विशेष स्थान रखता है। इस शुभ तिथि को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ होने के साथ ही मुख्य पूजा-आराधना और गुरु वंदन का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शास्त्रों में गुरु का स्थान त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के समान सर्वोपरि माना गया है।

गुरु पूर्णिमा का यह दिन केवल हमारे आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति ही नहीं, बल्कि हमारे माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी मार्गदर्शकों का आभार व्यक्त करने का एक सुनहरा अवसर है, जिन्होंने हमें जीवन में सही दिशा और ज्ञान दिखाया है। हालांकि, ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र दिन पर की गई कुछ गलतियां आपकी पूजा का पूरा पुण्य नष्ट कर सकती हैं और जीवन में परेशानियां ला सकती हैं।

1. गुरु या बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें

शास्त्रों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन सबसे बड़ी सावधानी यही रखनी चाहिए कि अपने गुरु, माता-पिता या बड़े-बुजुर्गों का भूलकर भी अनादर न हो। उनके प्रति कटु शब्द बोलना, बहस करना या मन में गलत विचार लाना बेहद अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से गुरु की कृपा रुक जाती है, मन अशांत रहता है और इस पावन दिन का सारा पुण्य फल समाप्त हो जाता है।

2. सात्विकता अपनाएं, तामसिक भोजन से रहें दूर

गुरु पूर्णिमा का दिन सादगी और आत्म-शुद्धि का प्रतीक है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए। इस दिन तामसिक आचरण या भोजन करने से माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति रुष्ट हो सकते हैं, जिससे घर की सुख-समृद्धि पर बुरा असर पड़ता है।

3. आलस्य, देर से सोकर उठना और काले कपड़े पहनना

इस पावन तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए। पूजा-पाठ में लापरवाही करना या मन में आलस्य रखना अशुभ माना जाता है। घर को साफ-सुथरा रखें और शाम के समय दीप प्रज्वलित करें। ध्यान रखें कि इस दिन पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें; इसके स्थान पर पीले या हल्के शुभ रंगों के वस्त्र धारण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

4. गुरु के पास खाली हाथ कभी न जाएं

यदि आप इस दिन अपने गुरु का आशीर्वाद लेने उनके पास जा रहे हैं, तो कभी भी खाली हाथ न जाएं। अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार कुछ फल, मिठाई, वस्त्र या दक्षिणा लेकर जाना सम्मान व निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर विधि-विधान और निष्ठा से गुरु पूजन करने से कुंडली में मौजूद ‘बृहस्पति दोष’ (Guru Dosha) भी शांत होता है और जीवन में ज्ञान व सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

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