Wed. Nov 4th, 2026

रेप और POCSO केस के लिए देश में बढ़ेंगी स्पेशल अदालतें, 3,788 करोड़ का बजट मंजूर; जानिए क्या बदलेगा

नई दिल्ली। देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर यौन अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) से जुड़े मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए चलाई जा रही फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होकर 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।

3,788 करोड़ रुपये का प्रावधान, निर्भया फंड से केंद्र देगा हिस्सा

इस योजना के आगामी पांच वर्षों के संचालन के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय ढांचा तय किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 2,353.15 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की हिस्सेदारी 1,434.89 करोड़ रुपये होगी। केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाने वाला पूरा खर्च निर्भया फंड के माध्यम से वहन किया जाएगा, जिससे अदालतों के बुनियादी ढांचे और संसाधनों को मजबूती मिलेगी।

779 से बढ़कर 850 होंगी अदालतें, स्टाफ की भी होगी तैनाती

योजना के तहत देशभर में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की कुल संख्या को मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें विशेष पॉक्सो अदालतें भी शामिल होंगी। मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने और लंबित मामलों के दबाव को कम करने के लिए प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। नई विशेष अदालतों की स्थापना उन जिलों में प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी, जहां ऐसे मामलों की पेंडेंसी सबसे अधिक है।

संवेदनशील गवाह केंद्र और बच्चों के अनुकूल माहौल पर जोर

इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को घटाना और पीड़ित महिलाओं व बच्चों को बिना किसी देरी के न्याय दिलाना है। योजना के प्रावधानों के तहत अदालतों के माहौल को बच्चों के अनुकूल बनाने के साथ-साथ संवेदनशील गवाहों के बयान सुरक्षित और तनावमुक्त माहौल में दर्ज कराने के लिए विशेष केंद्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उच्च न्यायालयों और डिजिटल डैशबोर्ड से होगी निगरानी

केंद्रीय न्याय विभाग द्वारा राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से इस योजना को जमीन पर उतारा जाएगा। अदालतों की कार्यप्रणाली, सुनवाई की गति और मुकदमों के निस्तारण की गुणवत्ता की निगरानी FTSC डैशबोर्ड, नियमित प्रगति रिपोर्ट और संबंधित उच्च न्यायालयों के साथ होने वाली आवधिक बैठकों के जरिए सुनिश्चित की जाएगी।

2019 से अब तक 4 लाख से अधिक मुकदमों का निपटारा

इस योजना की नींव 2 अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के आधार पर रखी गई थी। प्रारंभिक चरण में इसे एक वर्ष के लिए लाया गया था, जिसे आगे बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक किया गया था। वर्तमान में देश के 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें काम कर रही हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। योजना के शुरू होने से लेकर अब तक कुल 4,02,457 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया जा चुका है।

About The Author

इन्हें भी पढ़े

SKY TMT