AK-47 से लेकर सोने के बिस्किट तक, बस्तर में जमीन के नीचे छिपा मिला नक्सलियों का खजाना
CG News: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर डिवीजन में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस ने जंगलों में स्थित कई नक्सली ठिकानों से भारी मात्रा में सोना बरामद किया है। पिछले दो वर्षों में पुलिस ने कम से कम 8 किलोग्राम सोना जब्त किया है, जिसमें से अधिकांश हाल के महीनों में बिस्कुट के रूप में बरामद किया गया है। यह सोना बीजापुर जिले के बासागुड़ा और कुटरू तथा दंतेवाड़ा के बारसूर जैसे दूर-दराज के इलाकों में जमीन के नीचे प्लास्टिक के ड्रमों और बर्तनों में छुपाकर रखा गया था।
नोटबंदी के डर से सोने में बदल रहे थे काला धन
नक्सल विरोधी अभियानों के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद ने मीडिया को बताया कि नोटबंदी के अनुभव के बाद नक्सलियों को यह एहसास हुआ कि भविष्य में किसी भी आर्थिक झटके से बचने के लिए नकदी जमा करना जोखिम भरा है। इसलिए, उन्होंने अपने धन की सुरक्षा के लिए सोने में निवेश करना शुरू कर दिया। नक्सलियों को यह एहसास हो गया था कि सोना एक ऐसी नकदी संपत्ति है जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से नकद में बदला जा सकता है। पुलिस ने हाल ही में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के बंडल भी बरामद किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि नक्सली समय पर अपनी सारी पुरानी नकदी को बदलवाने में असमर्थ रहे थे।
बस्तर के सुदूर जंगलों से पिछले दो सालों में करीब 8 किलो सोना बरामद हुआ है।
नक्सली जमीन के नीचे प्लास्टिक के ड्रमों में हथियार और सोना छिपाकर डंप बनाते थे।
नोटबंदी के बाद नक्सलियों ने अपनी नकदी को बचाने के लिए सोने के बिस्कुट खरीदने शुरू किए थे।
कई अंडरग्राउंड डंप से एके-47 जैसी आधुनिक राइफलों के साथ सोने के बिस्कुट भी मिले हैं।
पुलिस अब आत्मसमर्पण कर चुके कमांडरों जैसे पापा राव की मदद से बाकी बचे गुप्त ठिकानों का पता लगा रही है।
पैसे की जगह इस्तेमाल करते थे सोने के सिक्के
पुलिस के अनुसार, कई मौकों पर नकदी के बजाय सोने के बिस्कुट सीधे विशेष नेताओं या कार्यकर्ताओं को उनके खर्चों को पूरा करने के लिए दिए जाते थे। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन सभी गुप्त ठिकानों तक पहुंचना मुश्किल है। कई गुप्त स्थानों की जानकारी केवल कुछ चुनिंदा शीर्ष केंद्रीय समिति नेताओं को ही थी, जिनमें से कई मारे जा चुके हैं। अब, पापा राव जैसे आत्मसमर्पण कर चुके विशेष क्षेत्रीय समिति के कार्यकर्ताओं की मदद से पुलिस शेष ठिकानों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।(एजेंसी)

