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राज्यसभा चुनाव का ऐलान होते ही बढ़ी हलचल, क्या बदलने वाला है सियासी समीकरण?

चुनाव आयोग द्वारा राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 10 राज्यों में होने वाले इस चुनाव को सिर्फ खाली सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्यसभा के सियासी समीकरण बदलने वाले बड़े मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अब संख्या बल बढ़ाने और अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

एक जून से शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए 1 जून को अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 11 जून तय की गई है। इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।

इन राज्यों की सीटों पर होगा चुनाव

इस चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की 4-4 सीटों पर मतदान होगा। वहीं मध्यप्रदेश और राजस्थान में 3-3 सीटों के लिए चुनाव होंगे। झारखंड में 2 सीटों पर वोटिंग कराई जाएगी, जबकि मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक सीट पर चुनाव होगा। इन राज्यों में विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

कई बड़े नेताओं का खत्म हो रहा कार्यकाल

राज्यसभा से जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ऐसे में इन सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक रूप से और ज्यादा अहम हो गया है।

कैसे होता है राज्यसभा चुनाव?

राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से कराया जाता है। इसमें जनता नहीं बल्कि राज्यों के विधायक मतदान करते हैं। विधायक बैलेट पेपर के जरिए उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में वोट देते हैं। यह ओपन बैलेट सिस्टम होता है, जिसमें विधायक को अपनी पार्टी को वोट दिखाना पड़ता है। किसी उम्मीदवार के तय कोटा हासिल करने पर अतिरिक्त वोट दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार को ट्रांसफर हो जाते हैं।

राज्यसभा की संरचना और कार्यकाल

राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से चुने जाते हैं, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 6 साल का होता है और हर दो साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। इसी कारण समय-समय पर चुनाव कराए जाते हैं।

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