अक्टूबर 2027 तक रक्षा सचिव बने रहेंगे राजेश कुमार सिंह: DRDO सुधारों के बीच कार्यकाल बढ़ा
नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण, स्वदेशी उपकरणों के विनिर्माण और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पुनर्गठन को गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को एक वर्ष का सेवा विस्तार प्रदान किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी कार्यावधि को 31 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
31 अक्टूबर 2026 को समाप्त होना था वर्तमान कार्यकाल
केरल कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने 1 नवंबर 2024 को भारत के 40वें रक्षा सचिव के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उस समय उन्होंने गिरधर अरमाने का स्थान लिया था। अगस्त 2024 में उनकी नियुक्ति के समय ही उन्हें निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु के बाद दो साल का तय कार्यकाल दिया गया था। अब सरकार ने उनके वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही एक अतिरिक्त वर्ष की सेवा वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
DRDO चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार भी जारी
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अलावा राजेश कुमार सिंह के पास 31 मई 2026 से रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार भी है। पूर्व प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह प्रभार उन्हें सौंपा गया था। नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक डीआरडीओ के नीतिगत व तकनीकी सुधारों का नेतृत्व भी उनके हाथों में बना हुआ है।
रक्षा आत्मनिर्भरता और नीतिगत निरंतरता को बल
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब भारत रक्षा पूंजीगत बजट का तीन-चौथाई हिस्सा स्वदेशी कंपनियों पर व्यय करने की नीति पर काम कर रहा है। रक्षा सचिव के कार्यकाल विस्तार से चल रही रक्षा खरीद वार्ताओं, घरेलू निजी क्षेत्र की भागीदारी और विदेशी रक्षा साझेदारियों में नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित होगी।
पूर्व के प्रशासनिक उदाहरणों में आर.के. माथुर और जी. मोहन कुमार जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी सेवानिवृत्ति आयु के उपरांत अपने दो वर्ष के तय कार्यकाल को पूरा किया था, जबकि 2019 में संजय मित्रा को तय अवधि के बाद तीन माह का विस्तार दिया गया था। केंद्र सरकार के इस ताजा फैसले से रक्षा प्रतिष्ठान के शीर्ष स्तर पर स्थिरता और सुधार कार्यक्रमों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

