Tue. Aug 4th, 2026

Datia By-Election: कांग्रेस ने 6056 वोटों से जीती दतिया सीट, नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर हारी BJP.. ‘भीतरघातियों पर गिरेगी गाज’

पूर्व गृहमंत्री के गृह क्षेत्र में कांग्रेस को 295 वोट, BJP को 264, शहर से 12 हजार वोटों का नुकसान..

 

दतिया/भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने 6,056 वोटों से भारतीय जनता पार्टी के आशुतोष तिवारी को पराजित कर दिया है।

लेकिन इस परिणाम का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक पहलू यह रहा कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के अपने ही पोलिंग बूथ पर भाजपा प्रत्याशी को कम वोट मिले। भाजपा के बड़े गढ़ और कद्दावर नेता के गृह क्षेत्र में ही भाजपा प्रत्याशी का पिछड़ना पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी असंतोष की पोल खोल रहा है।

पोलिंग बूथ का गणित.. नरोत्तम के घर में जीती कांग्रेस

दतिया के पोलिंग बूथ नंबर 121 यानि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बूथ के आधिकारिक आंकड़े भाजपा संगठन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

  • कांग्रेस (कुंवर घनश्याम सिंह): 295 वोट
  • भाजपा (आशुतोष तिवारी): 264 वोट

वरिष्ठ नेता के अपने ही बूथ पर भाजपा प्रत्याशी का पिछड़ना यह साफ बयां करता है कि टिकट बदलाव और स्थानीय समीकरणों से पार्टी के अपने ही मतदाता छिटक गए।

दतिया में क्यों हारी भाजपा? हार के बड़े कारण

  • नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना: दतिया से डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने के बाद से ही उनके समर्थकों और स्थानीय कैडर में भारी निराशा और सुगबुगाहट थी, जिसका सीधा असर वोटिंग पर पड़ा।
  • स्थानीय चेहरा न होना: भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर मतदाताओं में जुड़ाव की कमी दिखी। वे दतिया में उस स्तर का पब्लिक फेस नहीं बना पाए।
  • ब्राह्मण वोट बैंक में नाराजगी: दतिया का परंपरागत और निर्णायक माना जाने वाला ब्राह्मण वोट बैंक इस बार पूरी तरह भाजपा के पक्ष में लामबंद नहीं हो सका।
  • कुशवाह समाज का असंतोष: क्षेत्र के प्रमुख जातीय समीकरणों में से एक कुशवाह समाज का रुख भी भाजपा के प्रति नकारात्मक रहा।
  • शहर से मिली भारी शिकस्त: भाजपा दतिया शहर को अपना मजबूत गढ़ मानकर चल रही थी, लेकिन अकेले शहर से ही पार्टी को 12,000 से अधिक वोटों का नुकसान झेलना पड़ा।
  • भीतरघात और अंदरूनी खींचतान: चुनाव के दौरान संगठन के भीतर जारी अंतर्कलह और वरिष्ठ नेताओं की निष्क्रियता ने भाजपा का गणित बिगाड़ दिया।
  • युवा और किसान असंतोष: युवाओं और किसानों की स्थानीय समस्याओं को लेकर बनी नाराजगी भी कांग्रेस के पक्ष में गई।
  • सीनियर नेताओं का प्रचार से दूरी बनाना: जिले के कई वरिष्ठ स्थानीय चेहरे चुनाव प्रचार के दौरान मन से मैदान में सक्रिय नजर नहीं आए।

हार के बाद संगठन सख्त– ‘भीतरघातियों पर गिरेगी गाज’

दतिया में मिली इस करारी हार के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतगणना स्थल पहुंचकर इसे विनम्रता से स्वीकार किया और कहा कि “यह जनता का जनादेश है।”

वहीं भोपाल में संगठन स्तर पर हड़कंप मच गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि “भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। दतिया उपचुनाव के नतीजों की तथ्यात्मक समीक्षा की जाएगी। जिस भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी ने पार्टी के खिलाफ काम कर चुनाव प्रभावित किया है, उन दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई कर उन्हें भाजपा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।”

फिलहाल, इस हार के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में अंदरूनी मंथन तेज हो गया है।

 

About The Author

इन्हें भी पढ़े