भीषण गर्मी में नियुक्ति की मांग को लेकर D.Ed अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी, 135वें दिन भी धरने पर डटे युवा
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर D.Ed अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। राजधानी में चल रहा आमरण अनशन अब 135वें दिन में पहुंच चुका है। भीषण गर्मी और लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य के बावजूद अभ्यर्थी धरना स्थल पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे केवल लंबित नियुक्तियों को पूरा करने और न्यायालय के आदेशों का पालन कराने की मांग कर रहे हैं।
धरना स्थल पर गर्मी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। अभ्यर्थियों के मुताबिक अब तक 300 से ज्यादा युवाओं की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल भेजना पड़ा है। कई लोग लू, डीहाइड्रेशन और कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। रोजाना कुछ न कुछ अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन खत्म करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है।
अस्पताल में भर्ती हैं कई आंदोलनकारी
आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों ने बताया कि शैलेन्द्र साहू पिछले कई दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं संजय कश्यप को भी हृदय संबंधी परेशानी होने पर इलाज के लिए बिलासपुर भेजा गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव के कारण कई अभ्यर्थी अवसाद जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उनका कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही।
लंबित पदों को लेकर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि सहायक शिक्षक के 1316 पद अब भी खाली हैं। उनका कहना है कि केवल 1299 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जबकि बाकी पात्र उम्मीदवार अब भी इंतजार कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोगों को नियुक्ति दी गई, जिनके पास जरूरी D.Ed और TET योग्यता नहीं थी। उनका कहना है कि जब भर्ती के लिए बजट पहले से स्वीकृत है, तो फिर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने में देरी क्यों की जा रही है।
अलग-अलग तरीकों से किया गया प्रदर्शन
पिछले 135 दिनों में अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर कई प्रकार के आंदोलन किए। शुरुआत आमरण अनशन से हुई, लेकिन समय के साथ विरोध प्रदर्शन के तरीके भी बदलते गए।
कभी मौन धरना देकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई, तो कभी कैंडल मार्च निकाला गया। “एक कप चाय न्याय के नाम” जैसे अभियान भी चलाए गए। कुछ अभ्यर्थियों ने सांकेतिक भीख मांगकर अपनी स्थिति बताने की कोशिश की।
आंदोलन के दौरान महिलाओं ने बाल कटवाए, पुरुष अभ्यर्थियों ने मुंडन कराया और कई युवाओं ने घुटनों के बल चलकर विरोध दर्ज कराया। इसके अलावा जल सत्याग्रह और अंगारों पर चलने जैसे प्रदर्शन भी किए गए। शहीद दिवस पर अभ्यर्थियों ने भगत सिंह और सुखदेव के रूप में सांकेतिक प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
कई बार हुई कार्रवाई, फिर भी जारी है आंदोलन
आंदोलन के दौरान कई बार पुलिस कार्रवाई भी हुई। अभ्यर्थियों के अनुसार तीन अलग-अलग मौकों पर उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेजा गया। पहली बार बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सेंट्रल जेल में रखा गया था। इसके बाद भी आंदोलन नहीं रुका और अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन करते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष अब सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय के लिए है। उन्होंने राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को खून से पत्र लिखकर अपनी मांगों की जानकारी दी है।
सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अभ्यर्थियों ने कहा है कि यदि जल्द कोई फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। अब देखना होगा कि 135 दिनों से चल रहे इस आंदोलन के बाद सरकार कोई ठोस निर्णय लेती है या फिर अभ्यर्थियों का संघर्ष आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।
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