छत्तीसगढ़ में धान की फसल पर चक्रवात का खतरा, बारिश और तेज हवाओं से किसानों की बढ़ी चिंता
छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के असर से मौसम बिगड़ गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं के चलते खरीफ की तैयार फसल पर संकट मंडराने लगा है। धान की कटाई के अहम समय में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश की संभावना के बीच खेतों में खड़ी फसल, कटाई के बाद खुले में रखी उपज और अनाज की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है।
प्रदेशभर में मौसम का बदला मिजाज, धान की फसल पर असर
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बारिश ने खेती-किसानी की गतिविधियों को प्रभावित किया है। बलौदाबाजार-भाटापारा, रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, धमतरी, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा सहित कई क्षेत्रों में खराब मौसम को लेकर चिंता है। तेज हवा और बारिश से खेतों में खड़ी पकी धान की फसल गिर सकती है। वहीं, खेतों में पानी भरने से कटाई और उपज को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में देरी हो सकती है।
दाने खराब होने और फसल की गुणवत्ता घटने का खतरा
कटाई के समय लगातार नमी रहने से धान के दानों का रंग और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खेतों में गिरी बालियां लंबे समय तक गीली रहने पर कुछ परिस्थितियों में दानों के अंकुरित होने का जोखिम भी रहता है। इससे किसानों को उपज की गुणवत्ता और बिक्री से मिलने वाली कीमत को लेकर नुकसान की आशंका है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन बारिश थमने और खेतों की स्थिति का निरीक्षण होने के बाद ही किया जा सकेगा।
किसानों के लिए कृषि विश्वविद्यालय की सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग की सलाह के अनुसार, किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। पकी फसल की कटाई, पहले से काटी गई उपज को सुरक्षित रखने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने पर ध्यान देना जरूरी है। मौसम प्रतिकूल रहने के दौरान कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करने से बचने और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह मानने की भी सिफारिश की गई है।
किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है बारिश
छत्तीसगढ़ में धान की कटाई के दौरान हुई बारिश से फसल गिरने, खेतों में जलभराव और कटाई के बाद खुले में रखे अनाज के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। खासकर उन किसानों की चिंता बढ़ी है, जिनकी फसल पककर तैयार है या जिनकी कटाई हो चुकी है, लेकिन उपज सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंची है। फिलहाल राज्यभर में फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

