छत्तीसगढ़ में अर्नब तूफान से किसानों की कमर टूटी, 60 हजार शिकायतें पहुंचीं बीमा कंपनियों तक
छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान अर्नब के बाद खेती-किसानी पर पड़े असर की गंभीर तस्वीर सामने आने लगी है। मौसम की मार ने खरीफ सीजन की फसलों को नुकसान पहुंचाया है और हजारों किसान आर्थिक संकट में घिर गए हैं। खेतों में तैयार खड़ी फसल प्रभावित होने के बाद किसान अब अपनी भरपाई के लिए बीमा कंपनियों और राज्य सरकार की ओर देख रहे हैं। प्रदेश में महज तीन दिनों के भीतर 60 हजार से अधिक किसानों ने फसल खराब होने की सूचना दर्ज कराई है।
28 से 30 अक्टूबर 2026 के बीच मिली शिकायतों के बाद बीमा कंपनियों ने बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 50,962 मामलों में सर्वे की कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। वहीं राज्य सरकार ने भी नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए राजस्व, कृषि और उद्यानिकी विभाग को मुआवजे से जुड़े प्रकरण तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम की मार से धान उत्पादक किसानों की बढ़ी परेशानी
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती तूफान अर्नब का प्रभाव छत्तीसगढ़ के कई जिलों में देखने को मिला। तूफान के कारण हुई बारिश और तेज हवाओं ने खरीफ फसलों को प्रभावित किया है। कई इलाकों में धान की कटाई शुरू हो चुकी थी, जबकि दूसरे क्षेत्रों में फसल पककर खेतों में खड़ी थी।
ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा कर दिया। फसल खराब होने के बाद अब किसान चाहते हैं कि नुकसान का आकलन जल्द हो और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
50 हजार से ज्यादा मामलों में चल रही जांच
फसल नुकसान की सूचना देने वाले किसानों की संख्या बढ़ने के साथ ही बीमा कंपनियों के सामने सर्वे का बड़ा काम खड़ा हो गया है। अब तक 50,962 मामलों में सर्वे प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सर्वे के दौरान खेतों में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति और नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके बाद पात्रता के आधार पर बीमा दावों के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसानों के लिए यह सर्वे बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमा राशि का भुगतान इसी आकलन पर निर्भर करेगा।
बीमा कंपनियों ने बताई भुगतान की समयसीमा
किसानों को राहत देने के लिए बीमा कंपनियों ने 15 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति राशि देने का दावा किया है। इसके लिए शिकायत मिलने के बाद अलग-अलग चरणों में कार्रवाई की समयसीमा तय की गई है।
- 48 घंटे के भीतर सर्वेयर की नियुक्ति।
- 10 दिनों के भीतर खेतों में फसल नुकसान का सर्वे।
- 15 दिनों के भीतर पात्र किसानों को दावा राशि का भुगतान।
यह प्रक्रिया कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
किसान संघ ने सरकार से मांगी कर्जमाफी
फसल नुकसान के बीच किसानों ने केवल बीमा राशि ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त सरकारी राहत की मांग भी उठाई है। प्रदेश किसान संघ छत्तीसगढ़ के मोतीलाल सिन्हा ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों का संपूर्ण कृषि ऋण माफ करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि फसल खराब होने के बाद किसानों के सामने खेती की अगली तैयारी और पुराने कर्ज की अदायगी दोनों बड़ी चुनौतियां हैं।
7,507 मामलों को किया गया निरस्त
बीमा कंपनियों के पास पहुंची शिकायतों के आंकड़ों में निरस्त किए गए मामलों की संख्या भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 60 हजार शिकायतों में से 7,507 प्रकरण निरस्त किए गए हैं। वहीं 1,197 मामलों में बीमा कंपनी की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।
इसके अलावा 88 मामलों में सर्वे पूरा होने और 1,109 मामलों में सर्वेक्षण प्रक्रिया दर्ज होने की जानकारी दी गई है। बड़ी संख्या में मामले अभी लंबित हैं। ऐसे में किसानों को अपने दावों के निपटारे के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
कबीरधाम में सबसे ज्यादा किसानों ने दी सूचना
जिलेवार आंकड़ों में कबीरधाम सबसे आगे है। यहां 23,809 किसानों ने अपनी फसल को हुए नुकसान की जानकारी बीमा कंपनियों तक पहुंचाई है। इसके बाद बालोद और दुर्ग में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई हैं।
प्रमुख जिलों का विवरण:
| जिला | शिकायतें |
|---|---|
| कबीरधाम | 23,809 |
| बालोद | 7,237 |
| दुर्ग | 4,897 |
| खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | 4,223 |
| बेमेतरा | 3,671 |
| धमतरी | 3,141 |
| राजनांदगांव | 3,026 |
| कांकेर | 879 |
| सक्ती | 374 |
| सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 354 |
| जांजगीर-चांपा | 188 |
| गरियाबंद | 115 |
कबीरधाम में शिकायतों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में काफी अधिक है। वहीं बालोद, दुर्ग, बेमेतरा और राजनांदगांव में भी बड़ी संख्या में किसानों ने नुकसान की सूचना दी है।
बजाज कंपनी के पास पहुंचे सबसे ज्यादा दावे
बीमा कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, बजाज कंपनी के अंतर्गत आने वाले जिलों से सर्वाधिक शिकायतें मिली हैं। इसके बाद एचडीएफसी और एआईसी कंपनी का नंबर है।
कंपनीवार शिकायतों का विवरण:
- बजाज कंपनी: 30,058
- HDFC कंपनी: 17,176
- AIC कंपनी: 12,432
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तीनों कंपनियों के पास किसानों की बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं।
14447 नंबर पर दर्ज कराएं फसल नुकसान की सूचना
राज्य सरकार और बीमा कंपनियों ने किसानों से अपील की है कि वे फसल नुकसान की जानकारी दर्ज कराने में देरी न करें। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14447 उपलब्ध कराया गया है। किसान इस नंबर पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अब किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद समय पर सर्वे पूरा होने और मुआवजा मिलने से जुड़ी है। आने वाले दिनों में सर्वे रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि तूफान अर्नब ने प्रदेश की खेती को कितना नुकसान पहुंचाया है और कितने किसान बीमा राहत के पात्र बनते हैं।

