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CGPSC भर्ती घोटाला: ED के शिकंजे में अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया, WhatsApp चैट और 70 लाख के लेनदेन की जांच

CGPSC Recruitment Scam

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी सिलसिले में एजेंसी ने बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। 11 सितंबर को हुई इस कार्रवाई के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने छह दिनों के लिए ED की हिरासत मंजूर की।

बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी का फोकस परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के साथ-साथ उन लोगों के बीच हुए संपर्क और वित्तीय लेनदेन पर है, जिनके नाम इस मामले की जांच में सामने आए हैं।

आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर से बातचीत बनी जांच का आधार

ED के मुताबिक, जांच के दौरान चेतन बोरघरिया और आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई कथित WhatsApp बातचीत सामने आई है। एजेंसी ने अदालत में इस बातचीत से जुड़े तथ्यों का उल्लेख किया है। जांच अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाने का है कि इन बातचीत का CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से क्या संबंध था। साथ ही बोरघरिया के अन्य संदिग्ध लोगों से संपर्क और उनके बीच हुई गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कराने का दावा

जांच में एक महिला अभ्यर्थी से जुड़ा एक कथित मामला भी सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp चैट में प्रीलिम्स परीक्षा से पहले कथित तौर पर पेपर उपलब्ध कराने का जिक्र है। दावा है कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न उपलब्ध कराए गए पेपर से पूरी तरह मैच हुए। ED इस दावे से जुड़े साक्ष्यों और बातचीत की सत्यता की जांच कर रही है। फिलहाल इसे जांच में सामने आया आरोप माना जा रहा है, जिसकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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मेन्स पेपर के बदले 70 लाख रुपये?

मामले में मेन्स परीक्षा के पेपर को लेकर भी बड़ा वित्तीय दावा सामने आया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पेपर के नाम पर करीब 70 लाख रुपये के कथित लेनदेन की जानकारी जांच में सामने आई है।ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किसके माध्यम से दी गई, इसका स्रोत क्या था और कथित तौर पर पैसा किन लोगों तक पहुंचा। एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

भूपेश बघेल के OSD की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं

चेतन बोरघरिया का प्रशासनिक करियर उन्हें इस मामले में एक चर्चित नाम बनाता है। वह 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अपर कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। ED अब उनकी कथित भूमिका के साथ-साथ मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों से उनके संपर्क की भी पड़ताल कर रही है।

टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर के बाद बोरघरिया गिरफ्तार

CGPSC भर्ती से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED पहले ही छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार कर चुकी है। बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को मामले की उन कड़ियों की पड़ताल का मौका मिला है, जो कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा पेपर और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी हैं।

छह दिन की रिमांड में पूछताछ

विशेष अदालत ने चेतन बोरघरिया को छह दिन की ED रिमांड पर भेजा है। इस दौरान एजेंसी उनसे कथित WhatsApp चैट, परीक्षा से संबंधित जानकारी, पैसों के लेनदेन और अन्य आरोपियों के साथ संपर्क को लेकर पूछताछ करेगी। ED की जांच पूरी होने के बाद ही मामले में सामने आए दावों और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच में सामने आई जानकारी और आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

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