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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेंगी

ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन, 12% से अधिक एथिल अल्कोहल वाली ओरल दवाएं शेड्यूल H1 में शामिल, बिक्री और रिकॉर्ड रखने के नियम हुए सख्त

 

New Delhi. केंद्र सरकार ने दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए ड्रग्स रूल्स, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल वाली कुछ ओरल (पीने वाली) दवाओं की बिक्री बिना पंजीकृत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से ऐसी दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

 

सरकार द्वारा जारी संशोधन के अनुसार, वे सभी ओरल दवाएं जिनमें 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल मौजूद है और जिन्हें 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में बेचा जाता है, अब ‘शेड्यूल H1’ श्रेणी में शामिल की जाएंगी। इस श्रेणी में शामिल दवाओं की बिक्री पहले की तुलना में अधिक सख्त नियमों के तहत होगी और इन्हें केवल डॉक्टर की वैध पर्ची पर ही खरीदा या बेचा जा सकेगा।

 

नए नियमों के अनुसार मेडिकल स्टोर्स और दवा विक्रेताओं को इन दवाओं की प्रत्येक बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इसके लिए अलग रजिस्टर में मरीज का नाम, पता, डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन का विवरण, दवा का नाम, मात्रा और बिक्री की तारीख जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस रिकॉर्ड को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना भी आवश्यक होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियां इसकी जांच कर सकें।

 

सरकार का कहना है कि बाजार में उपलब्ध कुछ कफ सिरप, टॉनिक और अन्य ओरल दवाओं में अल्कोहल की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। चूंकि ये दवाएं कई स्थानों पर बिना डॉक्टर की पर्ची के आसानी से मिल जाती थीं, इसलिए कुछ लोग इनका इस्तेमाल नशे के रूप में करने लगे थे। इससे दवाओं के दुरुपयोग और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिमों की घटनाएं बढ़ रही थीं।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी दवाओं का लंबे समय तक या गलत तरीके से सेवन करने से लत लगने, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने तथा अन्य गंभीर चिकित्सीय समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण सरकार ने इनके वितरण और बिक्री पर अधिक नियंत्रण लागू करने का निर्णय लिया है।

 

यह संशोधन दवाओं के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद किया गया है। मामले की समीक्षा ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने की थी। दोनों विशेषज्ञ समितियों ने सरकार को नियमों में बदलाव की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन लागू किया गया।

 

सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना जारी रखना है, लेकिन उनके अनियंत्रित और गैर-चिकित्सीय उपयोग पर प्रभावी रोक लगाना भी उतना ही जरूरी है। नए नियमों से दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, दवाओं की ट्रैकिंग आसान होगी और गलत इस्तेमाल की घटनाओं पर निगरानी मजबूत हो सकेगी।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की दवा, विशेष रूप से अल्कोहल युक्त दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है और गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

 

 

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