भोपाल में प्रदर्शन पर सख्त पाबंदी: इन इलाकों पर नहीं दे सकेंगे धरना, जाने क्या है वजह
भोपाल। राजधानी भोपाल के मुख्य और सर्वाधिक व्यस्त यातायात गलियारों को जाममुक्त रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक फैसला लिया है। दिल्ली की तर्ज पर सार्वजनिक स्थलों पर अव्यवस्था रोकने के उद्देश्य से भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने रोशनपुरा चौराहा, पॉलिटेक्निक चौराहा और किलोल पार्क क्षेत्र में सभी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, हड़ताल, जुलूस और पुतला दहन पर आगामी दो महीनों के लिए पूर्ण रोक लगा दी है। कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
एम्बुलेंस और आपात सेवाओं के रास्ते को बाधा-मुक्त रखने की कवायद
पुलिस कमिश्नरेट के निर्देशानुसार, यह कदम राजधानी के अति-संवेदनशील मार्गों पर सामान्य जनजीवन और आपातकालीन परिवहन को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। रोशनपुरा, पॉलिटेक्निक और किलोल पार्क वे मुख्य संपर्क बिंदु हैं जो राजभवन, राजा भोज एयरपोर्ट, गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल जैसे प्रमुख चिकित्सा व प्रशासनिक केंद्रों को जोड़ते हैं। पूर्व में हुए आंदोलनों के दौरान इन मार्गों पर घंटों लंबा जाम लगने से एम्बुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही ठप हो जाती थी, जिससे मरीजों की जान पर गंभीर खतरा मंडराने लगता था।
आगामी 60 दिनों के लिए ये तीन चौराहे बने ‘नो-प्रोटेस्ट जोन’
प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने के साथ ही इन तीनों चौराहों और उनसे जुड़े प्रमुख मार्गों को औपचारिक रूप से नो-प्रोटेस्ट जोन घोषित कर दिया गया है। अब अगले 60 दिनों तक यहां किसी भी राजनीतिक, सामाजिक अथवा छात्र संगठन को विरोध सभा, घेराव या प्रतीकात्मक पुतला फूंकने की अनुमति नहीं मिलेगी। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और जनसुरक्षा के नियमों को तोड़ने वाले व्यक्तियों अथवा समूहों के विरुद्ध विधिक प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पिछले घटनाक्रमों से चरमराए यातायात के बाद उठा सख्त कदम
बीते कुछ महीनों में शहर के मध्य हिस्से में स्थित इन चौराहों पर विभिन्न संगठनों द्वारा बार-बार किए गए विरोध-प्रदर्शनों के चलते राजधानी का ट्रैफिक नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था। व्यस्ततम समय में मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाने से आम नागरिकों, नौकरीपेशा वर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आम जनजीवन को राहत देने और शहर की प्राथमिक जीवनरेखा माने जाने वाले मार्गों को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने यह प्रतिबंधात्मक व्यवस्था अमल में लाई है।


