Fri. Sep 18th, 2026

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लेकर बड़ा करार, BHEL-टिटागढ़ रेल मिलकर बनाएंगे 80 ट्रेनें

Vande Bharat Sleeper Trains Manufacturing + Maintenance: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के संबंध में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेटों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए एक संयुक्त उद्यम टीम का गठन किया जा रहा है। इसमें सरकारी उपक्रम कंपनियां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) शामिल हैं। दोनों कंपनियों ने 15 सितंबर, 2026 को एक संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह नई साझेदारी देश के 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेटों के दीर्घकालिक रखरखाव का कार्यभार संभालेगी।

यह समझौता भारतीय रेलवे द्वारा बीएचईएल-टिटागढ़ कंसोर्टियम को दिए गए लगभग ₹24,000 करोड़ की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना में 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेटों का निर्माण और आपूर्ति, साथ ही 35 वर्षों तक उनके व्यापक रखरखाव की जिम्मेदारी शामिल है। इसका अर्थ यह है कि समझौते की तिथि (15 सितंबर, 2026) से रेलवे वर्ष 2061 तक इन 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के संबंध में निश्चिंत रह सकता है।

80 वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव और सपोर्ट का भी काम

समझौते के अनुसार, बीएचईएल और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स की नई संयुक्त उद्यम कंपनी में 50:50 की बराबर हिस्सेदारी होगी। यह कंपनी परियोजना के तहत निर्मित होने वाली 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव का काम संभालेगी। इसका मतलब यह है कि परियोजना केवल रेलवे को नई ट्रेनें उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। ट्रेनों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए, उनका रखरखाव और सहायता भी परियोजना का हिस्सा है।

24,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में क्या-क्या शामिल?

BHEL-टिटागढ़ कंसोर्टियम को लगभग 24,000 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है, जिसे कई भागों में विभाजित किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य घटक 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेटों का निर्माण और आपूर्ति है। इसमें इन ट्रेनों के दीर्घकालिक रखरखाव और सहायता की जिम्मेदारी भी शामिल है। परियोजना में सरकारी विनिर्माण इकाइयों और ट्रेनसेट डिपो का उन्नयन भी शामिल है। यानी इसका मकसद सिर्फ ट्रेनें तैयार करना नहीं, बल्कि उनके संचालन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग टर्म सपोर्ट सिस्टम को भी मजबूत करना है।

35 साल की मेंटेनेंस क्यों अहम है?

इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता ट्रेनों के लिए व्यापक 35 वर्षीय रखरखाव योजना है। आमतौर पर, आधुनिक ट्रेनसेट की खरीद के लिए दीर्घकालिक रखरखाव की आवश्यकता होती है। इसलिए, निर्माण के साथ-साथ रखरखाव की जिम्मेदारी तय करके, ट्रेन के संपूर्ण जीवनचक्र को ध्यान में रखा जा सकता है।

टिटागढ़ रेल सिस्टम्स ने कहा कि रखरखाव अनुबंध पर हस्ताक्षर से बीएचईएल और टीआरएसएल के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूती मिलती है। कंपनी के अनुसार, भारतीय रेलवे उन्नत यात्री रेल प्रणालियों के लिए जीवनचक्र-आधारित समर्थन पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। कंपनी ने यह भी कहा कि घरेलू ट्रेन निर्माण और दीर्घकालिक रखरखाव क्षमताओं को एक साथ लाकर, यह कंसोर्टियम वंदे भारत स्लीपर बेड़े की निरंतर परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

वंदे भारत स्लीपर यानी लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना लंबी दूरी की रेल यात्रा पर केंद्रित है। इन ट्रेनों का विकास यात्रियों की सुविधा, आधुनिक डिजाइन और उन्नत तकनीक को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। जनवरी 2026 में देश में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जनवरी में ही हावड़ा-कामाख्या-हावड़ा मार्ग पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का शुभारंभ किया गया। इस ट्रेन का विकास चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) की तकनीक का उपयोग करके बीईएमएल द्वारा किया गया है। अब BHEL और टिटागढ़ के बीच हुआ नया समझौता 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण के साथ उनके लंबे समय तक रखरखाव की व्यवस्था को भी आगे बढ़ाता है। (एजेंसी)

About The Author