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जैसलमेर के पोखरण में वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन, लड़ाकू विमानों ने साधे सटीक निशाने

जैसलमेर: भारतीय वायु सेना ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में एक सप्ताह तक चलने वाला सैन्य अभ्यास “रोटर क्लैप-III” सफलतापूर्वक संपन्न किया। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस अभ्यास में वायु सेना की परिचालन तत्परता और ड्रोन रोधी क्षमताओं का व्यापक परीक्षण और प्रदर्शन किया गया। राजस्थान में रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करना था और इसमें भारतीय वायु सेना की कई हेलीकॉप्टर इकाइयों ने भाग लिया।

हेलीकॉप्टर बेड़े को सशक्त बनाने पर जोर

सूत्रों ने बताया कि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उभरते हवाई खतरों के खिलाफ परिचालन तैयारियों का परीक्षण करना और बदलते युद्धक्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए वायु सेना की युद्ध तत्परता को और मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) से बढ़ते खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर बेड़े की परिचालन क्षमता को मजबूत करना था। इसके साथ ही वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में एकीकृत हेलीकॉप्टर अभियानों के लिए रणनीतियों, कार्यप्रणालियों और मानक प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया गया।

ये युद्धाभ्यास हुए

वायु सेना के लगभग सभी प्रमुख हेलीकॉप्टर विमानों ने अभ्यास में भाग लिया और विभिन्न सामरिक अभियानों के माध्यम से अपनी युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन किया। सूत्रों के अनुसार, इनमें सटीक लक्ष्य भेदन, युद्धक्षेत्र में सहायता, सैनिकों की तैनाती, घायलों का सुरक्षित निष्कासन और हवाई एवं जमीनी खतरों से निपटने के लिए समन्वित अभियान शामिल थे।

वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अभ्यास

एक सप्ताह तक चले इस अभ्यास ने भारतीय वायु सेना के दल और परिचालन इकाइयों को युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी मिशन योजना, अंतर-इकाई समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संयुक्त अभियान क्षमताओं का परीक्षण और सत्यापन करने का अवसर प्रदान किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि चुनौतीपूर्ण रेगिस्तानी इलाके में विभिन्न हेलीकॉप्टर प्लेटफार्मों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।उन्होंने कहा कि पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज, जो देश के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में से एक है, वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित परिचालन अभ्यास करने और आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों, विशेष रूप से ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों से उत्पन्न खतरों के बीच हेलीकॉप्टर संचालन की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए एक उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। (एजेंसी)

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