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कोई दूसरा भला मानुष रिट याचिका लगाए

अवैध पार्किंग शहर के अंदर सड़कों पर

रायपुर। राजधानी समेत समूचे प्रदेश के शहरों में मवेशी सड़कों चौराहों पर मुंह मारते घूमते रहते हैं- बैठे रहते हैं। इस मामले पर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में लगने पर नगर निगम एवं जिला प्रशासन ने फौरी कार्रवाई की है। परंतु क्या केवल मूक मवेशी यातायात बाधित करने या दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हैं… !

गौरतलब हो कि किसी “भले मानुष” ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका लगा कहा था कि सड़कों पर गलियों, चौराहों, यत्र-त्रत मूक मवेशी घूमते-फिरते बैठे रहते हैं। जिससे दुर्घटना होने एवं यातायात भी बाधित होता है। हाईकोर्ट ने याचिका संज्ञान में लेकर त्वरित कार्रवाई कर पिछले रविवार को जजों की एक टीम मामले की मुआयना करने (जायजा) लेने भेजी। इसके ठीक पूर्व हरकत में आया जिला प्रशासन-नगर निगम ने काऊ कैचर टीमें उतार आनन-फानन में सैकड़ों-हजारों मवेशियों को महज 3-4 दिन में पकड़कर कांजी हाउस या गोठान भेज दिया। साथ ही चेतावनी जारी की है कि अगर कोई मवेशी दिखाई पड़ेगा। तो मालिक से जुर्माना 1000, दूसरी बार में 5000 लिया जाए।

खैर ! अब कोई दूसरे भला मानुष का इंतजार रहेगा। क्योंकि मूक मवेशी तो याचिका लगा नहीं सकते। दूसरा मानुष यह याचिका लगाए कि राजधानी में लोग तमाम प्रमुख मार्गों पूरक मार्गों, चौक-चौराहों, गलियों के आसपास अपना चार पहिया या दुपहिया वाहन अवैध तौर पर खड़ी करते हैं। जिससे सड़कों की चौड़ाई कम हो जाती है तो वही फुटपाथ पर पैदल यात्री चल नही पाते। यह गलत है, ट्रैफिक जाम एवं दुर्घटना की आशंका रहती है। लिहाजा त्वरित कार्रवाई हो। तमाम गलत पार्किंग किए गए वाहनों को शहर से बाहर यार्ड में भेजा जाए। फिर चेतावनी जारी हो, पहली बार गलत पार्किंग पर 1000 दूसरी बार पर 5000 रुपए एवं वाहन जब्ती।

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