रांची में आदिवासी नेत्री निशा भगत की संदिग्ध मौत, कैमरे के सामने की आत्महत्या
रांची: रांची के पिथोरिया थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आदिवासी नेता निशा भगत ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। खबरों के मुताबिक, आत्महत्या करने से पहले उन्होंने फेसबुक पर 10 मिनट का लाइव वीडियो पोस्ट किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और परिजनों के साथ-साथ आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है।
फेसबुक पर लाइव आकर बताया दर्द
वीडियो में निशा भगत ने खुद को आदिवासी समुदाय की योद्धा बताया। उन्होंने कहा कि अगर सनातन और सामाजिक मुद्दों को उठाना और सरकार की गलतियों को उजागर करना गलत है, तो वह अपनी जान देकर इसकी कीमत चुका रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रशासन से कई बार अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन उनकी अपील अनसुनी कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता इस स्थिति से बहुत दुखी होंगे, लेकिन उन्हें खुद अपमान और बदनामी से बहुत आहत किया है।
वीडियो में निशा ने यह भी कहा कि उन पर विभिन्न राजनीतिक दलों और व्यक्तियों से जुड़े होने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपने समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार संघर्ष किया है, लेकिन उन्हें लगता है कि प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। उन्हें बदनाम करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है और उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया है।
निशा ने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा दुख हुआ होगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई अधिकारियों और पुलिस स्टेशन के प्रभारी से संपर्क किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी जान देने जा रही हैं। अपने वीडियो में उन्होंने बार-बार कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।
‘मेरी मौत का जिम्मेदार झारखंड पुलिस’
सोशल मीडिया पर लाइव के दौरान दौरान, निशा भगत ने पिठौरिया पुलिस स्टेशन के प्रभारी को फोन किया और आत्महत्या करने की घोषणा की। कुछ घंटे पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “झारखंड पुलिस मेरी मौत के लिए जिम्मेदार है।” इस पोस्ट में उन्होंने मिशनरियों, धन और जमीन को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की थी।
अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित
धर्मांतरण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रही सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत पिठोरिया पुलिस थाना क्षेत्र के दाहूटोली गांव में रहती थीं। शुक्रवार को हुई घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो-बाबूलाल
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्हें आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली और उनकी मुखर आवाज रहीं युवा नेता निशा भगत की आत्महत्या की सूचना मिली है। उन्होंने इस आत्महत्या के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिथोरिया पुलिस स्टेशन के प्रभारी और अजय तिर्की को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इशारे पर कुछ दलाल आदिवासी जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं।राज्य के हर पुलिस स्टेशन और क्षेत्र में ज़मीन हड़पने का सिलसिला जारी है। आदिवासी समुदाय कब तक अपनी ही ज़मीन पर उत्पीड़न सहता रहेगा? बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाली एक युवती को इस हद तक प्रताड़ित किया जाना कि वह आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाए, इससे ज़्यादा शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। निशा भगत ने जिन लोगों को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार बताया है, उनकी शीघ्र गिरफ्तारी हो तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। (एजेंसी)

