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मध्य प्रदेश से उच्च सदन पहुंचे हरदीप पुरी: निर्विरोध जीत के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने लिया सर्टिफिकेट

भोपाल। मध्य प्रदेश की इकलौती रिक्त राज्यसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध चुन लिए गए हैं। 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे नाम वापसी की डेडलाइन खत्म होते ही निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली गई और विधानसभा सचिवालय से हरदीप पुरी के निर्वाचन का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। चूंकि पुरी दिल्ली में थे, इसलिए उनकी ओर से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने निर्वाचन अधिकारी से यह प्रमाणपत्र ग्रहण किया।

कैसे एकतरफा बना मुकाबला?

इस उपचुनाव में कांग्रेस और निर्दलीय खेमे की आपत्तियों के बावजूद हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी पर कोई आंच नहीं आई। 3 नवंबर को हुई संवीक्षा (स्क्रूटनी) में सभी आपत्तियां खारिज कर दी गईं और पुरी का नामांकन वैध पाया गया।

वहीं मैदान में उतरे दो अन्य दावेदारों के नामांकन तकनीकी और वैधानिक कमियों के चलते खारिज हो गए:

  • कांटे सयाना वैधानिक प्रस्तावक जुटाने में विफल रहे, वे राज्य विधानसभा के 10 प्रतिशत या 10 विधायकों के अनिवार्य हस्ताक्षर पेश नहीं कर सके।
  • राजकुमार लोहानी ने 2 नवंबर की तय समय सीमा तक चुनाव आयोग का अनिवार्य फॉर्म-26 दाखिल नहीं किया था।
  • इन दोनों के बाहर होते ही हरदीप पुरी का निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय हो गया था, जिस पर 5 नवंबर को औपचारिक मुहर लग गई।

2030 तक रहेगा कार्यकाल, शीर्ष नेतृत्व रहा था मौजूद

गौरतलब है कि यह सीट केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के 14 अक्टूबर को दिए गए इस्तीफे के कारण खाली हुई थी। इस सीट का मूल कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है, यानी हरदीप पुरी इस अवधि तक उच्च सदन के सदस्य रहेंगे।

इससे पहले 31 अक्टूबर को जब पुरी ने भोपाल में पर्चा भरा था, तब बीजेपी ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत दिखाई थी। उनके नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दोनों उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला व जगदीश देवड़ा, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पूरी कैबिनेट विधानसभा में उपस्थित रही थी। निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही बीजेपी ने मध्य प्रदेश की इस सीट को अपने पाले में बरकरार रखा है।

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