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वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी का दावा, SIR को लेकर योगी आदित्यनाथ ने उठाए सवाल

लखनऊ:उत्तर प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की एक बैठक में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की मतदाता सूची को लेकर एक अहम दावा किया। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से एक करोड़ से अधिक हिंदू मतदाताओं के नाम गायब हैं; इसके अलावा, सरकारी योजनाओं के लाखों लाभार्थियों, पंचायत स्तर के मतदाताओं और युवाओं के नाम भी इस सूची में नहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा संगठन को निर्देश दिया है कि इन नामों को सूची में शामिल कराने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को मतदाता सूची में त्रुटियों, मतदाता आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी और निगरानी में लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

हिंदू वोटर्स को लेकर जताई चिंता

मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी समिति की एक बैठक में बताया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में पात्र मतदाता गायब हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम इन सूचियों में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति के कारण 28 शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक मतदाता होने चाहिए, जबकि वर्तमान में यह संख्या लगभग 13 करोड़ है।

इन श्रेणियों के मतदाताओं का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 66 लाख ऐसे लोग हैं जिनके नाम पंचायत मतदाता सूची में तो हैं, लेकिन विधानसभा मतदाता सूची में नहीं हैं। उन्होंने आगे बताया कि सरकारी योजनाओं के 55 लाख लाभार्थी मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि 18-19 आयु वर्ग के लगभग 4.5 लाख युवा भी मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।

SIR अभियान की समीक्षा करें

मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की मदद से पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाना सुनिश्चित करें और इस अभियान की नियमित समीक्षा करें। सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को भी यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 13AA, ‘निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960’ और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए यह बताया गया है कि मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्यों की अंतिम प्रशासनिक और पर्यवेक्षी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) की होती है। CEO कार्यालय ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे फॉर्म 6 (नए मतदाताओं का पंजीकरण), फॉर्म 6A (प्रवासी मतदाताओं का पंजीकरण), फॉर्म 7 (प्रविष्टियों पर आपत्ति या नाम हटाने का अनुरोध), और फॉर्म 8 (पता बदलना, EPIC में सुधार या उसे बदलना, और दिव्यांग मतदाताओं की पहचान) के प्राप्त होने और उनके निपटान की समीक्षा करें।(एजेंसी)

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