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Vijay Sundi Story: पोलियो को हराया, मजदूरी की और अब जापान में रचा इतिहास; गरीब आदिवासी परिवार के पैरा तीरंदाज विजय सुंडी ने देश को दिलाया स्वर्ण पदक

Vijay Sundi Story: झारखंड के कोल्हान क्षेत्र से एक बेहद प्रेरणादायक और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा के रहने वाले पैरा तीरंदाज विजय सुंडी ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, गरीबी और शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स के पुरुष रिकर्व टीम इवेंट में विजय सुंडी और हरविंदर सिंह की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया है।

चीन को हराकर रचा इतिहास

खिताबी मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने दमदार खेल दिखाते हुए चीन की टीम को 5-1 से करारी शिकस्त दी। मैच की शुरुआत में पहला सेट 35-35 से बराबर रहने के बाद, भारतीय तीरंदाजों ने जबरदस्त वापसी की और दूसरा सेट 37-36 तथा तीसरा सेट 38-36 से जीतकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

संघर्षों से भरा रहा जीवन, मजदूरी तक करनी पड़ी

वर्ष 1996 में सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित बड़डीह गांव के एक साधारण आदिवासी परिवार में जन्मे विजय का जीवन शुरू से ही संघर्षों से घिरा रहा। बचपन में ही पोलियो की चपेट में आने के कारण वे सामान्य खेलों से दूर हो गए, लेकिन बांस के पारंपरिक धनुष-बाण से उनका लगाव उन्हें तीरंदाजी के करीब ले आया।

साल 2016 में उन्होंने चाईबासा के तुरतुंग तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र में राष्ट्रीय कोच महर्षि महेंद्र सिंकू के मार्गदर्शन में पेशेवर ट्रेनिंग शुरू की। हालांकि, आर्थिक तंगी और महंगे उपकरणों के अभाव के चलते उन्हें एक समय बेंगलुरु जाकर मजदूरी तक करनी पड़ी। अपनी मेहनत के दम पर पैसे जुटाकर उन्होंने मैदान पर वापसी की और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में झारखंड के लिए 5 पदक जीते। इसके बाद साल 2026 में दिल्ली में हुए ट्रायल्स के जरिए उनका चयन भारतीय टीम में हुआ और उन्होंने अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश को स्वर्ण पदक दिलाकर यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

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