Thu. Oct 22nd, 2026

जीतें तो सिस्टम सही, हारें तो EC खराब: नजफगढ़ में अमित शाह ने कांग्रेस के ‘दोहरे रवैये’ को घेरा

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव आयोग और एसआईआर (SIR) को लेकर कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष द्वारा राजधानी में किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ा पलटवार किया है। नई दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र में 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाली यमुना सफाई परियोजना की शुरुआत के मौके पर आयोजित सभा में शाह ने कहा कि देश की जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के कारण विपक्ष बौखलाहट में है और अपनी नाकामी छुपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ रहा है।

‘वोट चोरी का बहाना बनाकर नहीं बच सकते’

गृह मंत्री ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब जनता लगातार भारतीय जनता पार्टी को चुन रही है, तो इन्हें पेट में दर्द हो रहा है। राहुल जी देश की जनता आपकी असलियत समझ चुकी है। वोट चोरी का मनगढ़ंत नैरेटिव खड़ा करके असल में घुसपैठियों के वोट बैंक को बचाने की कवायद चल रही है। सड़कों पर भीड़ जुटाकर या धरना-प्रदर्शन करके देश के जनादेश को कभी झुठलाया नहीं जा सकता। यदि जनाधार वापस पाना है तो जनता के दुख-दर्द में भागीदार बनिए और जहां आपकी सरकारें हैं वहां काम करके दिखाइए, वरना जो थोड़ा-बहुत बचा है, वह भी समाप्त हो जाएगा।

चुनावी इतिहास गिनाकर दिखाया आईना

कांग्रेस पर राजनीतिक हमला जारी रखते हुए अमित शाह ने कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस का अस्तित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय परिदृश्य पर आने से दशकों पहले ही खत्म हो चुका था। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात और उत्तर प्रदेश में 41 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है, पश्चिम बंगाल में 54 साल और तमिलनाडु में 64 साल से उनकी सरकार नहीं बनी। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी वर्षों से कांग्रेस का यही हाल रहा है। शाह ने कहा कि जब वह आगामी 30 वर्षों तक बीजेपी की सरकार रहने की बात कहते हैं, तो विपक्ष इसे अलोकतांत्रिक बताता है, जबकि यह जमीनी सेवा का परिणाम है।

विदेशी दौरों और संवैधानिक संस्थाओं पर दोहरा रवैया

राहुल गांधी पर तंज कसते हुए गृह मंत्री ने कहा कि उन्हें हर छह महीने में विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती, वे इसी देश में रहकर जनता के बीच काम करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के विरोधाभासी बयानों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि केरल, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब वही चुनाव आयोग, वही मतदाता सूची और वही ईवीएम सही हो जाती है। लेकिन जहां हार मिलती है, वहां संस्थाओं पर सवाल उठाए जाने लगते हैं। जब अदालतें पक्ष में फैसला दें तो निष्पक्ष, और खिलाफ दें तो गलत। यह दोहरा मापदंड अब देश में नहीं चलने वाला।

शाह ने साफ संदेश दिया कि अन्य राज्यों से कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाकर सड़कों पर प्रदर्शन करने से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि जनता जमीनी काम और प्रदर्शन की राजनीति के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती है।

About The Author