UP चुनाव को लेकर कांग्रेस का ‘मिशन 150’: प्रियंका गांधी की टीम तैयार कर रही हर सीट का जातीय गणित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी चुनावी बिसात पूरी आक्रामकता के साथ बिछाना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के साथ संभावित सीट बंटवारे की मेज पर मजबूत स्थिति में बैठने के लिए पार्टी ने राज्य की 150 विधानसभा सीटों को चिन्हित कर एक प्रारंभिक सूची तैयार की है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
7 दिनों में आएगी माइक्रो-लेवल रिपोर्ट
पार्टी की स्टेटेजी कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह आगामी एक सप्ताह के भीतर इन 150 सीटों की विस्तृत आंतरिक रिपोर्ट तैयार कर प्रियंका गांधी को सौंपे। इस रिपोर्ट में केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं होगी, बल्कि सीट-दर-सीट कई पैमानों पर जांच होगी:
जातीय व सामाजिक समीकरण: दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं के अलावा गैर-यादव ओबीसी का प्रभाव।
महिला व युवा फैक्टर: महिला मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं का रुझान।
पारंपरिक इतिहास और विनेबिलिटी: संबंधित सीट पर कांग्रेस का ऐतिहासिक प्रदर्शन और वर्तमान में जीतने योग्य चेहरे की उपलब्धता।
इस रिपोर्ट के मिलने के बाद प्रियंका गांधी यूपी के सभी लोकसभा सांसदों और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठक कर जमीनी हकीकत का मिलान करेंगी।
सीट शेयरिंग में तगड़ी सौदेबाजी की रणनीति
कांग्रेस का स्पष्ट लक्ष्य यह है कि जब समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के तालमेल पर औपचारिक चर्चा शुरू हो, तो कांग्रेस के पास हर सीट पर अपनी दावेदारी साबित करने के लिए ठोस और अकाट्य तर्क हों। पार्टी के भीतर से अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं; सांसद इमरान मसूद और प्रदेश प्रभारी सहित कई नेता लगातार ‘सम्मानजनक हिस्सेदारी’ की मांग उठा रहे हैं। हालांकि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने सीटों की संख्या को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन कांग्रेस कम से कम 150 सीटों का पुख्ता दावा पेश करने के मूड में है।
लोकसभा नतीजों से बढ़ा आत्मविश्वास
बीते आम चुनावों में 6 लोकसभा सीटें जीतने और वोट प्रतिशत में हुए उल्लेखनीय इजाफे ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है। पार्टी अपने पारंपरिक जनाधार—दलित, मुस्लिम और सवर्ण (विशेषकर ब्राह्मण)—को वापस पार्टी से जोड़ने के लिए रणनीतिक कदम उठा रही है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के साथ कांग्रेस की केंद्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जमीनी हकीकत और आंतरिक सर्वे के सटीक आंकड़ों के साथ ही गठबंधन में मजबूत और सम्मानजनक हिस्सेदारी हासिल की जा सकती है।

