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ट्रेन में तेज आवाज में मोबाइल चलाने वालों की खैर नहीं, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल!

नई दिल्ली: ट्रेन में बिना ईयरफोन के स्पीकरफोन पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना अब भारी पड़ सकता है। ऐसा करने पर आपको छह महीने की जेल और 5,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों को होने वाली असुविधा को दूर करने के लिए सख्त कार्रवाई की है। ट्रेन में रील देखना, संगीत सुनना या स्पीकरफोन पर जोर से बात करना अब भारी जुर्माने और जेल की सजा का कारण बन सकता है। दक्षिण रेलवे ने बार-बार शोर मचाने पर छह महीने तक की जेल और 5000 तक जुर्माने का प्रावधान किया है। रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर मोबाइल फोन के स्पीकर से तेज आवाज में गाने बजाने, वीडियो देखने और दूसरे यात्रियों को परेशान करने वाली घटनाओं को देखते हुए ये सख्त कदम उठाया है। रेलवे ने यात्रियों से कहा है कि वे ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर मोबाइल का इस्तेमाल करते वक्त संगीत या वीडियो सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल करें।

ट्रेन में तेज आवाज से परेशानी

चेन्नई स्थित दक्षिणी रेलवे मुख्यालय ने एक पत्र में कहा है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर लाउडस्पीकरों से तेज आवाज में संगीत सुनना या वीडियो देखना अन्य यात्रियों की नींद खराब करता है। यहां तक ​​कि रात में भी लापरवाह यात्री ऐसी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। रेलवे ने स्टेशनों और ट्रेनों में लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से यात्रियों को चेतावनी देने का भी निर्णय लिया है। यह जानकारी हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएगी।

रेलवे बोर्ड के पुराने नियमों की याद दिलाई

दक्षिणी रेलवे ने रेलवे बोर्ड के 23 जुलाई, 2012 के निर्देशों का हवाला दिया। यात्रियों को पहले ही तेज आवाज में मोबाइल फोन पर बात करने, तेज रिंगटोन बजाने और लंबी बातचीत से बचने की सलाह दी गई थी। विशेषकर एसी डिब्बों में, स्पीकर पर संगीत सुनने या फिल्में देखने से भी मना किया गया था, क्योंकि इससे अन्य यात्रियों को असुविधा हो सकती है। यात्रियों को मोबाइल साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखने, रिंगटोन की आवाज कम रखने और फोन पर ऊंची आवाज में बात करने से बचने को कहा गया है। अब मोबाइल पर इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ट्रेनों और स्टेशनों पर मोबाइल के स्पीकर से गाने, वीडियो चलाने से शोरशराबा ज्यादा हो रहा है।

रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत क्या कार्रवाई?

रेलवे के पत्र में रेलवे अधिनियम की धारा 145 का उल्लेख किया गया है, जिसे सार्वजनिक न्यास अधिनियम 2026 द्वारा संशोधित किया गया है। यह धारा रेलवे परिसर में उपद्रव, हंगामा, अभद्र व्यवहार या रेलवे प्रशासन के नियमों में जानबूझकर बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करती है।

कितना जुर्माना और जेल

रेलवे परिसर में हंगामा करने वाले व्यक्ति को रेलवे कर्मचारी वहां से हटा सकता है. संबंधित स्थिति में उसका पास या टिकट भी जब्त किया जा सकता है और ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

बार-बार नियम तोड़ने पर: यदि रेलवे कर्मचारी के वैध निर्देश के बावजूद व्यक्ति उपद्रव जारी रखता है, तो उसे छह महीने तक की साधारण कैद या ₹5,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।

रेलवे कर्मचारियों के अधिकार: दक्षिणी रेलवे के निर्देशानुसार, टिकट परीक्षक से कम रैंक का कोई भी अधिकृत वाणिज्यिक कर्मचारी ऐसे मामलों में 1,000 रुपये का जुर्माना लगा सकता है। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि मोबाइल फोन पर संगीत बजाने से स्वतः ही कारावास नहीं होगा। मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

रेलयात्रियों के लिए निर्देश

ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर PA सिस्टम के जरिए हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में घोषणाएं की जाएं।
यात्रियों को स्पीकर पर तेज आवाज में संगीत या वीडियो चलाने से बचने के लिए कहा जाए।
मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बातचीत करने से बचने की अपील की जाए।
यात्रियों को ईयरफोन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाए।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में इस संबंध में नोटिस और सूचना-पट्ट लगाए जाएं।
नियमों का उल्लंघन करने और दूसरे यात्रियों को परेशान करने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाए (एजेंसी)

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