डीजल में शुरू हुई 5% बायोडीजल की मिलावट? लागत घटाने के लिए तेल कंपनियों का नया दांव
पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद अब डीजल में बायोडीजल के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल में 5% तक बायोडीजल मिलाया जा रहा है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और तेल कंपनियों पर पड़ रहे लागत के दबाव को बताया जा रहा है।
हालांकि, चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर 5% बायोडीजल मिश्रण शुरू होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। भारत में डीजल में बायोडीजल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देशभर में अभी से इसी अनुपात में मिश्रण किया जा रहा है।
डीजल में बायोडीजल मिलाने की क्या है वजह?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोलियम कंपनियों की खरीद लागत पर असर पड़ता है। वहीं, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने पर कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां कुछ जगहों पर डीजल में 5% तक बायोडीजल का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, इस दावे और संबंधित पेट्रोल पंपों की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
बायोडीजल को पारंपरिक डीजल के विकल्प या उसके साथ मिश्रण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
सोयाबीन और इस्तेमाल किए गए तेल से बनता है बायोडीजल
बायोडीजल बनाने के लिए सोयाबीन और पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों के साथ इस्तेमाल किए जा चुके कुकिंग ऑयल जैसे स्रोतों का उपयोग किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार डीजल के साथ किया जाता है।
भारत में जैव ईंधन को बढ़ावा देने का एक उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना है। हालांकि, बायोडीजल की गुणवत्ता, उपलब्धता और वाहन के अनुकूल होने जैसे पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी है।
2030 तक 5% ब्लेंडिंग का लक्ष्य
भारत में डीजल के साथ बायोडीजल के मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक 5% ब्लेंडिंग का लक्ष्य बताया गया है। यह एक नीतिगत लक्ष्य है। इसे देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर 5% मिश्रण लागू होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
वास्तविक ब्लेंडिंग का स्तर उत्पादन, आपूर्ति, उपलब्धता और सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर निर्भर करता है। इसलिए किसी खास पेट्रोल पंप पर बायोडीजल मिश्रित डीजल उपलब्ध होने की जानकारी के लिए आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
निजी कंपनियों ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम?
रिपोर्ट के अनुसार, Nayara और Jio-bp जैसी निजी कंपनियों ने हाल में पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। इसके विपरीत, सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखीं।
सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर तक नुकसान होने का दावा भी किया गया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, क्योंकि कंपनियों की लागत और वास्तविक नुकसान समय तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी क्यों आई?
दी गई जानकारी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत फरवरी में करीब 69 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव, आपूर्ति में रुकावट की आशंका और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी को इसकी वजह बताया गया है।
हालांकि, कीमतों की इस तुलना को प्रकाशित करने से पहले संबंधित तारीख और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क की पुष्टि करना जरूरी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन घरेलू ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होती हैं।
डीजल में एथेनॉल के बजाय दूसरे विकल्पों पर चर्चा
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के बाद डीजल में भी इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डीजल में वैकल्पिक घटक के तौर पर बायो-आइसोब्यूटेनॉल के इस्तेमाल की संभावना का उल्लेख किया था।
फिलहाल, डीजल में बायोडीजल ब्लेंडिंग को लेकर सबसे अहम सवाल यही है कि इसका इस्तेमाल कहां और कितनी मात्रा में हो रहा है। वाहन चालकों को ईंधन से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था के बारे में आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।

