OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार,सॉलिसिटर जनरल से मिले CM
भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले को रद्द किए जाने के बाद, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। गौरतलब है कि कमलनाथ के नेतृत्व वाली राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC के लिए आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था।
कानूनी परामर्श लेकर आगे बढ़ाया जाएगा कदम
यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने हाल ही में उस फैसले को रद्द कर दिया। इस मुद्दे पर काफी राजनीतिक विवाद भी हुआ। हाईकोर्ट के फैसले के बाद, बीजेपी और सरकार का लगातार यही कहना है कि कानूनी सलाह लेने के बाद ही आगे के कदम उठाए जाएंगे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मिले सीएम
इस सिलसिले में, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और राज्य के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह के साथ OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के कानूनी पहलुओं और भविष्य की कानूनी कार्यवाही की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
अध्यादेश को असंवैधानिक करार दिया
दरअसल, 9 अक्टूबर 2026 को दिए गए अपने फैसले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 2019 में बनाए गए उस कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जिसके तहत सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। कोर्ट ने इसे वापस 14 प्रतिशत तक सीमित कर दिया।
इंदिरा साहनी केस का जिक्र किया
कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस का भी जिक्र किया और आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा होने के मुद्दे पर बात की। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और उस पर अंतरिम रोक लगवाने पर विचार कर रही है।
कांग्रेस ने लगाया था आरोप
जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद, कांग्रेस ने मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया कि वह OBC के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए मजबूत तर्क और तथ्य पेश करने में नाकाम रही। वहीं दूसरी ओर, BJP का तर्क था कि कांग्रेस का लाया गया अध्यादेश बहुत कमजोर था और इसी कमी की वजह से OBC को उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे थे।(एजेंसी)

