मिलने के अनुरोध पर रात में ही भेज दिया था जवाब’: राहुल गांधी के SC मार्च से पहले बोले CJI सूर्यकांत
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के घटक दलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च निकाले जाने के आह्वान के बीच देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्षी सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश से मिलकर अपनी चिंताएं साझा करने का समय मांगा था। हालांकि, विपक्ष के सड़क पर उतरने से ठीक पहले सीजेआई ने सार्वजनिक रूप से बयान देकर साफ कर दिया कि वे इस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात क्यों नहीं कर सकेंगे।
‘कल रात ही भेज दिया था लिखित जवाब, बता दिए थे कारण’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें विपक्षी नेताओं की ओर से बैठक का एक औपचारिक अनुरोध पत्र प्राप्त हुआ था। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने बीती रात ही उस पत्र का लिखित प्रत्युत्तर भेज दिया था, जिसमें उन सभी परिस्थितियों और कारणों का ब्योरा दे दिया गया था जिसके चलते वे व्यक्तिगत रूप से विपक्षी नेताओं से मिलने में असमर्थ हैं। इस स्पष्टीकरण के साथ मुख्य न्यायाधीश ने राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के साथ किसी भी तरह की अनौपचारिक बैठक की संभावना को खारिज कर दिया।
‘सड़क नहीं याचिका का रास्ता चुनें, सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले’
संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर देते हुए सीजेआई ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत किसी भी आम नागरिक अथवा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए हमेशा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख करने का पूरा अधिकार है। यदि कोई भी पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करता है, तो सुप्रीम कोर्ट उस पर कानून सम्मत तरीके से विचार करेगा और जो भी न्यायोचित कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे।
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ जेपीसी दौरे पर बोले- ‘हितों के टकराव से बचना जरूरी’
इस दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट दौरे के रद्द होने के फैसले पर भी अहम बात रखी। उन्होंने बताया कि उस विषय में हितों के टकराव की गंभीर गुंजाइश बन रही थी। इसी कारण वरिष्ठ जजों के साथ प्रशासनिक स्तर पर मंथन किया गया। सीजेआई ने दोहराया कि न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसी किसी भी स्थिति से पूरी तरह बचना आवश्यक था जहां हितों के टकराव की जरा सी भी गुंजाइश हो।

