सिंधिया संपत्ति विवाद में बहस पूरी, 40 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी पर 14 अक्टूबर को फैसला
ग्वालियर: देश के सबसे समृद्ध राजघरानों में शुमार सिंधिया परिवार की करीब 40,000 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले सिंधिया परिवार से जुड़े विवाद में कानूनी तौर पर एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। ग्वालियर जिला न्यायालय ने समझौते और उस पर आपत्तियों के संबंध में दोनों पक्षों के बीच हुई बहस को समाप्त कर दिया है। अब न्यायालय यह तय करेगा कि वह वसुंधरा राजे सिंधिया, उनकी बहनों और अन्य रिश्तेदारों द्वारा दायर समझौते के आवेदन पर सीधे फैसला सुनाए या पहले प्रतिमा देवी की आपत्तियों के संबंध में गवाही और सबूत दर्ज करे। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
अदालत में खुली सीलबंद दस्तावेजों की फाइल
बुधवार को सक्षम न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान समझौते से संबंधित सभी सीलबंद दस्तावेज खोले गए। दोनों पक्षों ने न्यायालय के समक्ष अपने तर्क प्रस्तुत किए। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और राजमाता विजयराजे सिंधिया की पुत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने न्यायालय में कहा कि उनके और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य पक्षों के बीच समझौता हो गया है। अतः सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23, नियम 3 के तहत इस मामले में डिक्री पारित की जानी चाहिए।

वसुंधरा पक्ष ने कहा, गवाही की जरूरत नहीं
वसुंधरा राजे ने तर्क दिया कि चूंकि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है, इसलिए इस स्तर पर अलग से गवाही दर्ज करने या अतिरिक्त साक्ष्य लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, प्रतिमा देवी द्वारा उठाई गई आपत्तियों का भी समाधान किया जाना चाहिए। न्यायालय से अनुरोध किया गया कि वह समझौते को रिकॉर्ड में दर्ज करे, मामले का निपटारा करे और मुकदमे को समाप्त करे।
प्रतिमा देवी ने मांगा साक्ष्य पेश करने का अवसर
दूसरी ओर, पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी का प्रतिनिधित्व कर रही वकील ने अदालत में दलील दी कि उनकी आपत्तियों पर फैसला करने से पहले मुद्दों का निर्धारण किया जाना चाहिए और उन्हें अपने पक्ष में सबूत और गवाही पेश करने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। प्रतिमा देवी के पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि सबूतों के बिना उनकी आपत्तियों का निपटारा करना अन्यायपूर्ण होगा। दोनों पक्षों ने अपने तर्कों के समर्थन में अदालत के पूर्व फैसलों को प्रस्तुत किया।
2015 से चल रहा है संपत्ति विवाद
सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति को लेकर यह विवाद 2015 से अदालत में लंबित है। वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोदरा राजे सिंधिया और उषा राजे ने परिवार की संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी का दावा किया था। हालांकि, पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने इस समझौते पर आपत्ति जताई, जिससे मामला फिर से कानूनी बहस में आ गया।
14 अक्टूबर को होगा अहम फैसला
अब अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर फैसला करने से पहले गवाही और अन्य सबूत दर्ज करना आवश्यक है या नहीं। अदालत इस मुद्दे पर 14 अक्टूबर को विचार करेगी। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला सीधे समझौते के माध्यम से आगे बढ़ेगा या आपत्तियों की सुनवाई के लिए सबूत और गवाहों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही सिंधिया परिवार की संपत्तियों से जुड़े इस बहुचर्चित विवाद पर अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत की अगली कानूनी दिशा तय होगी। (एजेंसी)

