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‘अगर वो दरवाजा नहीं खुलता तो…’: जब 34 हजार फीट पर सह-पायलट ही बन गया कातिल, कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू को बताई रोंगटे खड़े करने वाली सच्चाई

दुबई से तेल अवीव की उड़ान भर रहे फ्लाईदुबई के विमान में 174 मुसाफिरों की जिंदगी मौत के मुहाने पर थी, जब कॉकपिट के भीतर ही एक खौफनाक साजिश रची गई। इस रूह कंपा देने वाले हमले को नाकाम कर सभी यात्रियों को सुरक्षित जमीन पर उतारने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर लंबी बातचीत की है। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को भारत, इजरायल और पूरी इंसानियत का सच्चा नायक बताते हुए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन मछार को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में पवित्र मशाल प्रज्वलित करने का दुर्लभ न्योता दिया है—जो सम्मान सिर्फ वहां के नागरिकों के लिए आरक्षित माना जाता है।

‘प्रार्थना का बहाना और पीछे से जानलेवा वार’

प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत में कैप्टन स्मित मछार ने उस खौफनाक सफर की परतें खोलीं। उन्होंने बताया कि विमान हवा में सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। तभी कॉकपिट में मौजूद सह-पायलट ने कहा कि उसे इबादत करनी है। कैप्टन स्मित ने पेशेवर मर्यादा का पालन करते हुए सामने देखते रहना उचित समझा और पीछे मुड़कर दखल नहीं दिया। लेकिन महज चार से पांच मिनट के भीतर अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर बेहद भारी और तेज वार हुआ।
कैप्टन ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि शायद विमान किसी आसमानी हलचल या बड़ी तकनीकी खराबी का शिकार हो गया है। मगर जब सिर पर एक के बाद एक लगातार घातक चोटें पड़ने लगीं, तब उन्हें समझ आया कि खतरा बाहर नहीं, बल्कि कॉकपिट के अंदर ही है और उनका अपना सह-पायलट आपातकालीन औजार से उनकी जान लेने पर तुला है।

जब 17 हजार फीट नीचे गोता खाने लगा विमान

लगातार हमलों के कारण कैप्टन स्मित के सिर से खून का फव्वारा फूट पड़ा और आंखों के आगे धुंधलापन छाने लगा। इसी कशमकश के बीच विमान का नियंत्रण बिगड़ा और वह करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरने लगा। उड़ान के दौरान विमान में 17 हजार फीट से ज्यादा की अचानक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और इमरजेंसी सिग्नल एक्टिव हो गए।
फर्श पर गिर चुके कैप्टन स्मित के जेहन में सिर्फ एक ही बात कौंध रही थी कि अगर कॉकपिट का दरवाजा किसी तरह नहीं खुला, तो विमान में सवार 174 मुसाफिरों में से कोई जिंदा नहीं बचेगा। उन्होंने खून से लथपथ हालत में उठकर दरवाजा खोला, लेकिन हमलावर ने झपटकर उसे फिर बंद कर दिया। अपनी अंतिम सांस और बची हुई पूरी ताकत को समेटकर कैप्टन ने दोबारा आपातकालीन दरवाजा खोल दिया। गेट खुलते ही केबिन क्रू और यात्रियों ने तुरंत अंदर घुसकर हमलावर को काबू में कर लिया, जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया।

‘मौत के मुंह में भी नहीं खोया होश’: नेतन्याहू

कैप्टन स्मित की इस रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी को सुनकर बेंजामिन नेतन्याहू भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि ऐसे असंभव और भयावह हालात में भी खुद पर काबू बनाए रखना और सही वक्त पर सही फैसला लेना एक असाधारण मिसाल है। नेतन्याहू ने कहा कि कैप्टन स्मित ने जिस दिलेरी से 174 निर्दोष लोगों के प्राणों की रक्षा की, उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है और उनका यह अदम्य साहस हमेशा याद रखा जाएगा।

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