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Drishyam 3 Review: अजय देवगन और जयदीप अहलावत की जंग, ‘दृश्यों’ के इस खतरनाक खेल में क्या इस बार भी जीत गए विजय सलगांवकर?

Drishyam 3 Review: दर्शकों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सस्पेंस और थ्रिल से भरी फ्रेंचाइजी की आखिरी कड़ी ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में एक बार फिर अजय देवगन, जयदीप अहलावत, तब्बू और प्रकाश राज जैसे दिग्गज कलाकार आमने-सामने नजर आ रहे हैं। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी यह फिल्म पुरानी दोनों फिल्मों के सिरों को जोड़ते हुए एक नया रोमांचक सफर शुरू करती है।

क्या है ‘दृश्यम 3’ की कहानी?

फिल्म की कहानी साल 2022 में आई ‘दृश्यम 2’ के आगे से शुरू होती है। अपने बेटे समीर को खोने वाली पूर्व आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) की निराशा और खुद की जान लेने की कोशिश से फिल्म की शुरुआत होती है। इसके बाद उनके पति महेश देशमुख (रजत कपूर) केस को दोबारा खोलने की गुजारिश करते हैं, जिसकी कमान क्राइम ब्रांच के नए एसपी राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) को मिलती है।

खुद को ‘शनि’ बताने वाले राजवीर की पैनी नजरें एक बार फिर विजय सलगांवकर (अजय देवगन) और उसके परिवार पर टिक जाती हैं। इस बार पुलिस के पास विजय के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए नए सबूत, पुख्ता गवाह और कभी कोई केस न हारने वाले तेज-तर्रार वकील इंद्रजीत शेट्टी (प्रकाश राज) का साथ है। ऐसे में ‘2 अक्टूबर को क्या हुआ था?’ के बाद अब सवाल यह है कि ’23 जुलाई को क्या हुआ था?’, जिसका जवाब तलाशने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।

जानिए कैसी है फिल्म और एक्टिंग?

फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने कहानी को बांधे रखने की पूरी कोशिश की है। हालांकि केस को दोबारा बिल्ड करने में थोड़ा वक्त जरूर लगता है, लेकिन इंस्पेक्टर गायतोंडे (कमलेश सावंत) की कॉमिक टाइमिंग और शानदार डायलॉग्स बीच-बीच में दर्शकों को बांधे रखते हैं। इंटरवल के बाद शुरू होने वाला कोर्टरूम ड्रामा फिल्म की असली यूएसपी (USP) है, जो आपको अपनी सीटों पर जकड़े रखता है।

अभिनय की बात करें तो अजय देवगन ने हमेशा की तरह बिना ज्यादा बोले अपनी बोलती आंखों और इंटेंस अभिनय से विजय सलगांवकर के किरदार को अमर कर दिया है। जयदीप अहलावत एसपी राजवीर के रूप में बेहद असरदार लगे हैं, जबकि प्रकाश राज भी अपने प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे हैं। श्रिया सरन, तब्बू और रजत कपूर ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। सुधीर चौधरी की सिनेमेटोग्राफी और अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के रोमांच को कई गुना बढ़ा देता है।

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