‘अगर ये न होते तो राख हो जाता प्लेन!’ कौन हैं पायलट स्मित मच्छार? जिन्होंने खुद लहूलुहान होकर बचाई 180 जानें
डेस्क। हवा में 35 हजार फीट की ऊंचाई पर जब मौत सामने खड़ी थी, तब एक भारतीय जांबाज ने अपने हौसले से इतिहास रच दिया। दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में सवार 180 यात्रियों के लिए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार साक्षात देवदूत बनकर सामने आए। कॉकपिट के भीतर को-पायलट द्वारा किए गए जानलेवा चाकू के हमलों को अपने शरीर पर झेलते हुए भी कैप्टन स्मित ने विमान का संतुलन बिगड़ने नहीं दिया और एक भयानक हादसे को टाल दिया। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है— कैप्टन स्मित मच्छार।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार और क्या हुआ था कॉकपिट में?
कैप्टन स्मित मच्छार अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन ‘फ्लाईदुबई’ में एक अनुभवी वाणिज्यिक पायलट हैं। बुधवार को जब विमान उड़ान भर चुका था, तभी ओमान के नागरिक को-पायलट ने कथित तौर पर पूरे विमान को क्रैश कराने की खौफनाक साजिश रची। कैप्टन स्मित ने जैसे ही उसके खतरनाक इरादों को भांपा, वे तुरंत भिड़ गए। दोनों के बीच कॉकपिट में हिंसक हाथापाई हुई, जिसमें हमलावर ने कैप्टन स्मित पर चाकू से कई वार किए। खून से लथपथ होने के बावजूद भारतीय कैप्टन ने कॉकपिट का कंट्रोल हमलावर के हाथ में नहीं जाने दिया। इस कशमकश में विमान महज एक मिनट में 16 हजार फीट नीचे आ गिरा था और ‘स्क्वाक कोड 7500’ एक्टिवेट हो गया था।
यात्रियों का दखल और सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग
विमान के भयानक गोता खाने और कॉकपिट से आ रही चीखों को सुनकर केबिन में मौजूद यात्रियों ने साहस का परिचय दिया और दरवाजा तोड़ दिया। राहत की बात यह रही कि विमान में कुछ अन्य पायलट भी यात्रा कर रहे थे, जिन्होंने स्थिति को संभाला और घायल कैप्टन की मदद की। इसके बाद विमान का रूट डायवर्ट कर सऊदी अरब के तबुक एयरबेस पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। घायल कैप्टन स्मित मच्छार को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। उनकी इस फुर्ती और जज्बे के कारण ही 180 इजरायली यात्रियों की सांसें सुरक्षित बच सकीं।
क्या कह रहे हैं लोग? सोशल मीडिया पर उमड़ा सम्मान का सैलाब
इस अदम्य साहस की खबर सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स कैप्टन स्मित मच्छार को ‘रियल लाइफ सुपरहीरो’ और ‘भारत का सच्चा गौरव’ बता रहे हैं। एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लोग लिख रहे हैं कि ‘अगर उस दिन कॉकपिट में यह भारतीय जांबाज न होता, तो आज 180 परिवार उजड़ गए होते।’ वहीं कई अंतरराष्ट्रीय यूजर्स और एविएशन विशेषज्ञों ने कहा है कि अपनी जान की परवाह किए बिना यात्रियों की हिफाजत करना उच्चतम दर्जे की पेशेवर निष्ठा का उदाहरण है। दुनिया भर में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं और उनके लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग उठा रहे हैं।

