उज्जैन शाही मस्जिद विवाद में इंदौर हाईकोर्ट का फैसला: डबल बेंच ने खारिज की अपील, सड़क चौड़ीकरण पर रोक से इनकार
इंदौर/उज्जैन। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत जारी सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर छिड़े विवाद में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इंदौर खंडपीठ ने बेहद स्पष्ट और निर्णायक रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शाही मस्जिद कमेटी द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन को बड़ी कानूनी राहत मिली है और कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक प्रस्तावित 15 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
कमेटी की याचिका में नहीं मिला आधार, कोर्ट ने नकारी दलीलें
शाही मस्जिद कमेटी ने निचली अदालत और सक्षम प्राधिकरण के उस फैसले के विरुद्ध हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दायर की थी, जिसमें सड़क निर्माण की जद में आ रहे निर्माण को हटाने की अनुमति दी गई थी। कमेटी ने तर्क रखा था कि धार्मिक ढांचे के किसी भी भाग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न की जाए और मौजूदा स्थिति बनाए रखने का स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया जाए। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों के विधिक तर्कों, व्यापक जनहित और सिंहस्थ 2028 की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस अपील को सुनवाई योग्य नहीं माना और खारिज कर दिया।
सिंहस्थ 2028: 900 मीटर लंबे मार्ग पर 7 धार्मिक स्थल थे चिन्हित
उज्जैन प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे रास्ते को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण के दायरे में कुल 7 धार्मिक संरचनाएं आ रही थीं। जनहित और आपसी सद्भाव की मिसाल पेश करते हुए अधिकांश स्थलों के प्रभावित हिस्सों को पहले ही हटाया जा चुका है। वहीं पास ही स्थित बोहरा समाज की मस्जिद के भी सड़क की जद में आ रहे हिस्से को कमेटी ने खुद ही स्वेच्छा से पीछे हटा लिया था।
रात की सहमति के बाद सुबह उपद्रव, 10 संदिग्ध पकड़े गए
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि रविवार देर रात कलेक्टर और शहर काजी खलिकुर्रहमान के बीच सौहार्दपूर्ण बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि मस्जिद प्रबंधन के लोग ही स्वेच्छा से अलाइनमेंट में आने वाले हिस्से को हटाएंगे, ताकि किसी प्रशासनिक मशीनरी का सीधा उपयोग न हो। सोमवार सुबह जब काम शुरू हुआ, तभी सोशल मीडिया पर भ्रामक संदेश फैलने के बाद दूसरा गुट मौके पर एकत्र हो गया और सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए पथराव कर दिया। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 5 संदिग्ध सोशल मीडिया पर फर्जी व भड़काऊ सूचनाएं फैलाने के आरोप में पकड़े गए हैं। 5 अन्य बाहरी जिलों के व्यक्ति हैं, जो माहौल खराब करने के उद्देश्य से उज्जैन में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों की फुटेज के आधार पर पथराव करने वाले अन्य असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन अब कड़े सुरक्षा पहरे के बीच चौड़ीकरण के शेष कार्य को समयसीमा में पूरा करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

